280 करोड़ की योजना बेकार, भरा तालाब लेकिन खेत सूखेबलकुंदी तालाब में उगी झाडिय़ां और उपेक्षित स्थिति।

इलकल के बलकुंदी में नहरों के अभाव से किसानों को नहीं मिला लाभ, लापरवाही पर आक्रोश

इलकल (बागलकोट). तालुक के बलकुंदी गांव स्थित 390 एकड़ क्षेत्रफल वाले बड़े तालाब में कृष्णा नदी से पानी भरने के बावजूद किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। नहरों के अभाव में एक एकड़ भूमि भी सिंचित नहीं हो पा रही, जिससे करोड़ों रुपए की योजना पर सवाल उठ रहे हैं।

किसानों का कहना है कि तालाब के रखरखाव पर हर वर्ष लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन स्थिति यह है कि तालाब की परिधि और भीतर झाड़-झंखाड़ उग आए हैं। साथ ही, आसपास की ग्रेनाइट खदानों का कचरा भी तालाब क्षेत्र में डाला जा रहा है, जिससे सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है।

1973 में निर्मित इस तालाब के साथ 8 किमी (बाईं ओर) और 3 किमी (दाईं ओर) लंबी नहरें बनाई गई थीं, जो अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। किसानों का आरोप है कि मरम्मत के नाम पर खर्च तो दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं होता।

किसानों ने इस मुद्दे को लोकायुक्त और मानवाधिकार आयोग तक पहुंचाया है। लोकायुक्त ने 27 अप्रेल तक नहर और वाल्व की मरम्मत कर पानी खेतों तक पहुंचाने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

किसान नेता मल्लनगौड़ा तुंबद ने कहा कि 280 करोड़ रुपए खर्च कर तालाब भरा गया, लेकिन नहरों के बिना पानी बेकार बह रहा है। उन्होंने सरकार से नई नहरों के निर्माण और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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By Bharat Ki Awaz

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