कारखानों के विस्तार और बसापुर झील विवाद के खिलाफ मानव श्रृंखला बनाकर विरोध
कोप्पल. पर्यावरण प्रदूषण और औद्योगिक विस्तार के विरोध में जिला बचाओ आंदोलन समिति तथा पर्यावरण हितरक्षण संयुक्त क्रिया मंच का अनिश्चितकालीन आंदोलन के 150वें दिन में प्रवेश करने पर प्रदर्शनकारियों ने अशोक सर्किल में बसापुर झील के मुद्दे पर मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज कराया।
प्रदूषण से प्रभावित गांवों की हालत गंभीर
कार्यक्रम में पहुंचे साहित्यकार श्यामसुंदर बिदरकुंदी ने प्रभावित गांवों का दौरा करने के बाद कहा कि वहां की स्थिति अत्यंत दयनीय है। एक घंटे भी वहां रहना मुश्किल है, ऐसे में लोग पूरी जिंदगी कैसे गुजार रहे हैं, यह समझ से परे है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और सरकार से अपील की कि वे लोगों को केवल मतदाता नहीं, बल्कि इंसान समझें।
सरकार से जल्द समाधान की मांग
संयुक्त मंच के प्रमुख संयोजक अल्लमप्रभु बेट्टदूर ने कहा कि आंदोलन कितने भी दिन चले, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने सरकार से जल्द लोगों की समस्याओं को समझकर समाधान निकालने की मांग की।
बसापुर झील विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया
प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन के उस बयान का विरोध किया, जिसमें कहा गया था कि बसापुर झील सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार एक निजी कारखाने के दायरे में आती है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में ऐसा कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है और प्रशासन जनता को गुमराह कर रहा है। उनका कहना है कि 5 जनवरी 2022 को हाईकोर्ट ने झील को आसपास के गांवों और पशुओं के उपयोग के लिए खुला रखने का निर्देश दिया था।
लोगों के हक और पर्यावरण की लड़ाई
आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि यह संघर्ष केवल झील या जमीन का नहीं, बल्कि लोगों के जीवन, पानी और पर्यावरण की रक्षा का है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
200वें दिन फिर जुटेंगे आंदोलनकारी
श्यामसुंदर बिदरकुंदी ने कहा कि यह आंदोलन मानवता की पीड़ा को दूर करने के लिए है और वे इसके 200वें दिन फिर से शामिल होंगे।
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