उज्जनी जलाशय से भीमा नदी में छोड़ा 42 हजार क्यूसेक पानीजिलाधिकारी बी. फौजिया तरन्नुम।

बाढ़ की चेतावनी

कलबुर्गी. महाराष्ट्र में उज्जनी जलाशय से भीमा नदी में 42 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी रविवार शाम को जिले के अफजलपुर तालुक स्थित सोन्न बैराज पहुंचा। अगर उज्जनी और वीर जलाशयों से और पानी आता है, तो सोन्न बैराज के जरिए भीमा नदी में और बेन्नेतोरा जलाशय के जरिए नदियों में पानी छोड़ा जाएगा।

जिलाधिकारी बी. फौजिया तरन्नुम ने जिले के लोगों से दोनों नदीयों के किनारों की ओर न जाने और सावधानी बरतने की अपील की है।
सोन्न बैराज से भीमा नदी में 4,000 क्यूसेक पानी पहले ही छोड़ा जा रहा है। बारिश के पूर्वानुमान के कारण जैसे-जैसे जलाशयों में पानी का प्रवाह बढ़ेगा, पानी का बहिर्वाह भी बढ़ेगा। सोन्न और बेन्नेतोरा बैराज के नीचे नदी बेसिन में रहने वाले लोगों से एहतियात के तौर पर अपने पशुओं को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का अनुरोध किया गया है।

नदियों, नहरों, नालों और झीलों के किनारे कपड़े धोना, तैरना, मवेशी-बछड़ों को चराना मना है और खतरनाक पुलों को पार नहीं करना चाहिए। पर्यटकों को नदियों और नालों में तैरने और नदी किनारे स्थित पर्यटन स्थलों पर तस्वीरें और सेल्फी लेने का जोखिम नहीं उठाना चाहिए। मछुआरों को बाढ़ के दौरान मछली पकडऩे के लिए नदी में न जाने की सलाह दी गई है।

जिलाधिकारी ने कहा कि लगातार बारिश के कारण घरों, स्कूलों, आंगनबाडियों और अन्य इमारतों के गिरने की आशंका है, इसलिए अधिकारियों को जनता की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाने चाहिए। बाढ़ के कारण किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए, हर गांव में ढिंढोरा पीटकर और माइक के माध्यम से जागरूकता पैदा करनी चाहिए। नदियों, नालों और झीलों के किनारे स्थित मंदिरों, मस्जिदों और प्रार्थना कक्षों में पूजा करने वालों को नदी के किनारे न जाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ से हुए नुकसान की प्रारंभिक रिपोर्ट प्रतिदिन जिला प्रशासन को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि जिला, तालुक, होबली (राजस्व केंद्र) और ग्राम पंचायत स्तर के अधिकारी और कर्मचारी केंद्र स्थान पर रहकर बाढ़ व भारी बारिश के कारण जिले में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने चाहिए। संभावित बाढ़ की स्थिति में, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचना चाहिए। राहत केंद्रों में पीडि़तों को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए।

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By Bharat Ki Awaz

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