कर्नाटक के 8 सरकारी मेडिकल कॉलेजों को 50-50 अतिरिक्त सीटेंसांदर्भिक फोटो।

एनएमसी की मंजूरी, अब एमबीबीएस सीटों की संख्या में बढ़ोतरी

हुब्बल्ली. कर्नाटक को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से हरी झंडी मिलने के बाद राज्य के 8 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रत्येक को 50-50 अतिरिक्त एमबीबीएस सीटें आवंटित की गई हैं।

इनमें बेलगावी, चिक्कबल्लापुर, गुलबर्गा (कलबुर्गी), हासन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, मैसूर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, रायचूर मेडिकल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बेंगलूरु स्थित अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज और अन्य मेडिकल साइंसेज संस्थान शामिल हैं।

बीदर, चामराजनगर, गदग, कारवार, कोप्पल, मंड्या और शिवमोग्गा मेडिकल साइंसेज संस्थानों को सीट वृद्धि की मंजूरी नहीं मिली है। इसी तरह, रामनगर और कनकपुर मेडिकल साइंसेज संस्थान की नई प्रस्तावित योजनाएं भी अधोसंरचना की कमी के कारण वापस ले ली गई हैं।

एनआरआई कोटा और फीस

स्वास्थ्य शिक्षा मंत्री शरण प्रकाश पाटील ने बताया कि अब सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी 15 प्रतिशत सीटें एआरआई छात्रों के लिए आरक्षित होंगी। एक एनआरआई सीट की फीस 25 लाख रुपए तय की गई है। इससे सरकारी मेडिकल कॉलेजों को सरकार के अनुदान पर पूरी तरह निर्भर न रहकर आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

निजी/डीम्ड विश्वविद्याल

डीम्ड विश्वविद्यालयों में से केवल जगद्गुरु गंगाधर महास्वामी त्रिवेणी मठ मेडिकल कॉलेज को 50 अतिरिक्त सीटें मिली हैं। वहीं, श्री सिद्धार्थ मेडिकल कॉलेज, तुमकुर और श्री सिद्धार्थ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बेंगलूरु को मंजूरी नहीं दी गई है।

कानूनी अड़चन

रिश्वत प्रकरण में फंसे जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (जेएनएमसी) के प्रवेश पर रोक लगाने के एनएमसी आदेश को धारवाड़ हाईकोर्ट की पीठ ने अंतरिम स्थगन दिया है।

2025-26 शैक्षणिक वर्ष

29 अगस्त के आदेश के अनुसार, मेडिकल काउंसलिंग कमेटी और कर्नाटक एग्जामिनेशन अथॉरिटी को निर्देश दिया गया है कि वे क्रमश: 188 एमबीबीएस और 12 एमबीबीएस सीटों को सीट मैट्रिक्स में शामिल कर समय पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी करें।

पिछले वर्ष कर्नाटक में कुल 12,395 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध थीं। अतिरिक्त सीटों के साथ इस वर्ष राज्य के मेडिकल शिक्षा ढांचे को और मजबूती मिलेगी।

Spread the love

By Bharat Ki Awaz

मैं भारत की आवाज़ हिंदी न्यूज़ पोर्टल से जुड़ा हुआ हूँ, जहाँ मेरा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा ख़बरें पहुँचाना है। राजनीति, समाज, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों पर गहरी रुचि रखते हुए मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि समाचार केवल सूचना न हों, बल्कि पाठकों को सोचने और समझने का अवसर भी दें। मेरी लेखनी का मक़सद है—जनता की आवाज़ को मंच देना और देश-समाज से जुड़े हर पहलू को ईमानदारी से प्रस्तुत करना। भारत की आवाज़ के माध्यम से मैं चाहता हूँ कि पाठक न केवल ख़बरें पढ़ें, बल्कि उनसे जुड़ाव महसूस करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *