शनि देव की मूर्ति समझकर होती थी पूजा
जांच में निकला 12-13वीं सदी का वीर स्मारक
बेलगावी. मल्लम्मन बेलवडी गांव में वर्षों से शनि देव की मूर्ति मानकर जिस पत्थर की पूजा की जा रही थी, वह दरअसल एक ऐतिहासिक ‘वीरगल्लु’ (वीर स्मारक) निकला। इस महत्वपूर्ण खोज का श्रेय 9वीं कक्षा की छात्रा लक्ष्मी प्रकाश हुंबी को जाता है।
लक्ष्मी रोज मंदिर में दर्शन के लिए जाती थी। हाल ही में उसने उस पत्थर की मूर्ति को साफ किया और स्कूल में पढ़े इतिहास के पाठ से उसकी तुलना की। उसे संदेह हुआ कि यह किसी वीरता की घटना से जुड़ा स्मारक हो सकता है। उसने यह बात अपने पिता को बताई। बाद में गांव के वरिष्ठ लोगों ने जांच की तो पता चला कि यह वास्तव में ऐतिहासिक महत्व का वीरगल्लु है।
स्थानीय इतिहास शोधकर्ता और बेलवडी संस्थान पर पीएचडी कर चुके बालप्पा ईरप्पा चिनगुडी के अनुसार छात्रा की सूझबूझ सराहनीय है, हालांकि यह वीरगल्लु मल्लम्मा से संबंधित नहीं बल्कि उस संस्थान के किसी वीर सैनिक की स्मृति में स्थापित है। शिलालेख विशेषज्ञ हनुमाक्षी गोगी और लक्ष्मण तेलगावी ने भी इसकी पुष्टि की है।
इतिहासकारों के मुताबिक यह वीरगल्लु संभवत: 12वीं या 13वीं शताब्दी का है और इसमें तीन भागों में चित्रांकन किया गया है। निचले भाग में एक वीर को गायों की रक्षा के लिए युद्ध करते हुए दिखाया गया है। दूसरे भाग में वीरगति प्राप्त करने के बाद उसे पालकी में बैठाकर अप्सराओं द्वारा कैलाश ले जाने का दृश्य उकेरा गया है। ऊपरी भाग में शिवलिंग और नंदी के साथ स्वर्ग प्राप्ति का प्रतीकात्मक चित्र है, जहां देवदूत पूजा करते दिखते हैं।
पत्थर पर सूर्य और चंद्र के प्रतीक भी उकेरे गए हैं, जो वीरता की अमरता का संकेत देते हैं। हालांकि बीच के शिलालेख समय के साथ काफी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे उन्हें पढ़ पाना कठिन हो गया है।

