हुब्बल्ली में शनिवार को हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. श्रीधर दंडप्पनवर के नेतृत्व में शिरूर पार्क स्थित शहरी नाले में गप्पी-गंबूसिया मछली के बच्चों को छोड़ते नगर निगम कर्मचारी।

नगर निगम की कार्रवाई
हुब्बल्ली. हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर निगम के विभिन्न क्षेत्रों में मच्छरों की बढ़ती आबादी के चलते नगर निगम ने उन्हें नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं। झीलों, बांधों, शहरी नलों और पानी जमा होने वाले क्षेत्रों में गप्पी-गम्बूसिया मछली छोड़ी जा रही है।
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने शहर के तोलनकेरे और शिरूर पार्क के पास बहने वाले शहरी नालके के जमा हुए पानी में गप्पी-गंबूसिया मछली छोड़ी हैं। इसके जरिए मच्छरों के उत्पादन को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। 20 हजार मछलियां छोड़ी गई हैं।

पहले शहरी नाले करें साफ
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिरूर पार्क अय्यप्पास्वामी मंदिर, बनशंकरी आवासीय इलाका, देवीनगर, लिंगराज नगर के पास शरी नाला बह रहा है इसके 3 किमी तक के क्षेत्र में मच्छरों की संख्या बढ़ी है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत ग्रीन मोबिलिटी कॉरिडोर का काम चल रहा है और ड्रेनेज व सीवेज पाइपलाइन डालने के लिए नले का पानी यहां-वहां रोका गया है। रुके हुए पानी में गंदे पौधे उगने से मच्छरों की संख्या बढ़ी है।

कोई फायदा नहीं है
बनशंकरी आवासीय इलाके की रूपा हंचिन ने बताया कि शहरी नाले का विकास कार्य तीन साल से चल रहा है और यह अभी तक पूरा नहीं हुआ है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और शाम के समय घर से बाहर निकलते ही काट लेते हैं। बुखार, खांसी से पीडि़त लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। नाले की सफाई के बिना गप्पी-गम्बूसिया मछली के बच्चों को छोडऩे से कोई फायदा नहीं है।

2 लाख गप्पी-गंबूसिया मछली के बच्चों का संग्रह
मच्छरों के नियंत्रण के लिए हम पहले ही अन्निगेरी से 2 लाख गप्पी-गंबूसिया मछली के बच्चों को संग्रहकर रखा है। पहले चरण के रूप में, शहरी नाला बहने वाले शिरूर पार्क और बनशंकरी आवासीय क्षेत्र के आसपास के जलग्रहण क्षेत्रों में मछलियों के बच्चों को छोड़ा है। मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और मस्तिष्क बुखार (एन्सेफलाइटिस) मच्छरों से फैलते हैं। मच्छर का काटना भले ही छोटा हो, परन्तु असर बुरा होता है। इन बीमारियों का कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, इसलिए एहतियात के तौर पर इसका समाधान तालाबों और पानी जमा होने वाले क्षेत्रों में मछलियों को छोडऩा है। मच्छरों के लार्वा चरण में होने पर ही मछली के बच्चे इन्हें खा जाते हैं। इससे मच्छरों को नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. श्रीधर दंडप्पनवर, स्वास्थ्य अधिकारी, हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर निगम

फॉगिंग की जा रही है
पानी जमा होने वाले और मच्छरों का प्रकोप अधिक होने वाले क्षेत्रों की पहचान की जा रही है और लार्वा सर्वेक्षण किया जा रहा है। सर्वेक्षण में स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ 200 से अधिक नर्सिंग छात्रों ने भाग लिया है। घर घर जाकर जानकारी एकत्रित की जा रही है, पानी की टंकी, गमलों, बोतल, टायर व आसपास के वातावरण को जल जमाव से मुक्त रखने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इसके अलावा, शहर के सभी आवासीय इलाकों में फॉगिंग की जा रही है। पानी में पाए जाने वाले कीड़ों को गलती से टेल वर्म समझ लिया जाता है। वे मच्छर के लार्वा हैं और हम उन्हें खत्म करने के लिए गप्पी-गंबूसिया मछली के बच्चे छोड़ रहे हैं।
डॉ. ईश्वर उल्लागड्डी, आयुक्त, हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर निगम

Spread the love

By Bharat Ki Awaz

मैं भारत की आवाज़ हिंदी न्यूज़ पोर्टल से जुड़ा हुआ हूँ, जहाँ मेरा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा ख़बरें पहुँचाना है। राजनीति, समाज, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों पर गहरी रुचि रखते हुए मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि समाचार केवल सूचना न हों, बल्कि पाठकों को सोचने और समझने का अवसर भी दें। मेरी लेखनी का मक़सद है—जनता की आवाज़ को मंच देना और देश-समाज से जुड़े हर पहलू को ईमानदारी से प्रस्तुत करना। भारत की आवाज़ के माध्यम से मैं चाहता हूँ कि पाठक न केवल ख़बरें पढ़ें, बल्कि उनसे जुड़ाव महसूस करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *