कंप्ली-गंगावती तुंगभद्रा पुल जर्जर, बारिश में कटता संपर्ककंप्ली तुंगभद्रा नदी में आई बाढ़ से डूबा पुल।

राज्य व अंतरराज्य यात्रियों को हो रही परेशानी

बल्लारी. तुंगभद्रा नदी पर बना कंप्ली-गंगावती पुल छह दशक पुराना हो चुका है और अब “जर्जर पुल” की पहचान से जाना जा रहा है। तुंगभद्रा जलाशय से नदी में 1 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने पर यह पुल डूब जाता है, जिससे कल्याण कर्नाटक, मध्य व उत्तर कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना से संपर्क 10 दिन से लेकर एक महीने तक के लिए टूट जाता है।

हर बरसात में यह समस्या दोहराई जाती है और ऐसे समय में ही सभी को नए पुल की याद आती है। आपात स्थिति में कंप्ली-गंगावती के लोगों को बुक्कसागर के पास कडेबागिलु पुल होकर लगभग 35 किमी घूमकर जाना पड़ता है। छात्रों, रोगियों, किसानों और यात्रियों को खासा कष्ट उठाना पड़ता है।

बाढ़ के दौरान पानी के साथ बहकर आने वाला कचरा और लकड़ी के ग_े पुल की सुरक्षा रेलिंग को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे यह और कमजोर हो गया है। हर बार पानी उतरने के बाद लोक निर्माण विभाग केवल सीमेंट की परत और लोहे की रेलिंग की अस्थायी मरम्मत कर देता है।

सरकार से स्थायी समाधान की मांग

जनता का कहना है कि दिन-ब-दिन कमजोर होते पुल की केवल अस्थायी मरम्मत से हादसा टल नहीं सकता। 16 जून 2025 को लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली ने पुल का निरीक्षण कर अपने कार्यकाल में नए पुल का वादा किया था, परन्तु अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

लंबे समय से चल रहा आंदोलन

लोगों का आरोप है कि स्थानीय संगठनों के पदाधिकारी दशकों से नए पुल की मांग कर आंदोलन कर रहे हैं। भाजपा शासन के दौरान निर्माण की बातें हुईं, परन्तु वे केवल बयानबाजी रह गईं। अब भी आंदोलन जारी है परन्तु सरकार ध्यान नहीं दे रही है।

नया पुल निर्माण करें

कंप्ली किले के किसान कोटेम्यागल नागराज ने कहा कि तुंगभद्रा नदी पुल के उस पार (चिक्कजंतकल्लु) मागाणी इलाके में हम धान और केले की खेती करते हैं। हर बार नदी में बाढ़ आने पर 10 से 20 दिन आवागमन बंद हो जाता है, जिससे खेतों की देखभाल में रुकावट आती है और नुकसान उठाना पड़ता है। इसका समाधान केवल नया पुल निर्माण है।

पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा

द्वितीय पीयूसी विज्ञान छात्र इमान्यूएल कहा कि नदी से संपर्क कट जाने पर कंप्ली से गंगावती शहर के स्कूल-कॉलेज जाने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। इस दौरान समय पर कक्षा में नहीं पहुंच पाने से पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा है।

नबार्ड से अनुदान देने का आश्वासन

कंप्ली तुंगभद्रा नदी पर नया पुल बनाने के संबंध में हाल ही में मैंने मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या और लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली से मुलाकात कर चर्चा की है। नाबार्ड से अनुदान जारी करने का आश्वासन मिला है।
जे.एन. गणेश, विधायक, कंप्ली

सरकार को सौंपा प्रस्ताव

लोक निर्माण विभाग मंत्री ने हाल ही में पुल का निरीक्षण किया है। साथ ही कर्नाटक ग्रामीण अवसंरचना विकास निगम की ओर से नए पुल के निर्माण के लिए सरकार को संशोधित प्रस्ताव सौंपा है।
जे. विश्वनाथ, ईईई, पीडब्ल्यूडी

गंगावती रोड-रेल पुल का निर्माण हो

आंध्र प्रदेश की गोदावरी नदी पर बने रोड और रेल पुल (राजमुंडरी कमान ब्रिज) की तर्ज पर कंप्ली तुंगभद्रा नदी पर भी पुल बनाना चाहिए। पहले से सर्वे हो चुके गंगावती-कंप्ली-दरोजी रेलवे संपर्क और वाहन यातायात दोनों के लिए यह मॉडल ब्रिज भविष्य में लाभदायक होगा।
के.एम. हेमय्यास्वामी, अध्यक्ष, कंप्ली तालुक रेलवे मार्ग क्रिया समिति

कई बार ज्ञापन भी सौंपा

कंप्ली तुंगभद्रा नदी पर नया पुल बनाने की मांग को लेकर हमने शहर बंद कर पहले ही सरकार का ध्यान खींचा है। साथ ही कई बार ज्ञापन भी सौंपे हैं।
जी.जी. चंद्रण्णा, अध्यक्ष, प्रगतिशील संगठनों का महासंघ (गैर-राजनीतिक), कंप्ली

पुल का इतिहास

कंप्ली तुंगभद्रा नदी पर पुल निर्माण का भूमिपूजन 17 फरवरी 1959 को तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री एच.एम. चन्नबसप्पा ने किया था। जुलाई 1961 में मैसूर सरकार के लोक निर्माण मंत्री एच.के. वीरन्नगौड़ा ने इसका उद्घाटन किया था। यह पुल राज्य राजमार्ग-29 के 80.400 किमी पर स्थित है। इसकी लंबाई 1,934 फीट, चौड़ाई 22 फीट है और इसमें कुल 51 जल प्रवाह मार्ग (मेहराब) हैं।

क्षमता से अधिक माल ढुलाई

पिछले कुछ वर्षों से जिले के इस्पात कारखानों के लिए सामग्री ढोने वाले ट्रक इसी पुल से गुजरते हैं। पुल पर 15 टन तक का भार ले जाने की अनुमति का संकेत बोर्ड लगा है, परन्तु नियमों का उल्लंघन कर भारी ट्रक इससे अधिक भार ढो रहे हैं, जिससे पुल के जर्जर होने की शिकायतें सामने आई हैं।

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By Bharat Ki Awaz

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