केंद्र सरकार की मंजूर के बाद भी अधर में कई योजनाएं
हुब्बल्ली. कर्नाटक में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे विकास परियोजनाएं जमीन अधिग्रहण की समस्या से जूझ रही हैं। राज्य सरकार अपने हिस्से की राशि समय पर नहीं दे रही है, जिससे केंद्र सरकार की ओर से मंजूर कई योजनाएं अधर में लटक गई हैं।
राज्य की 27 हाईवे परियोजनाएं और 5 रेलवे लाइनें भूमि अधिग्रहण न होने के कारण प्रभावित हैं। इन योजनाओं को केंद्र-राज्य की 50:50 लागत साझेदारी पर मंजूरी मिली थी परन्तु राज्य सरकार की अनिच्छा और विलंब की वजह से कई परियोजनाएं, जिन्हें 3-4 साल पहले मंजूरी मिल चुकी थी, अब तक शुरू नहीं हुए।
हाईवे परियोजना की स्थिति
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में कहा कि एनएच-150 यादगीर बायपास के लिए राज्य सरकार को 39.23 करोड़ रुपए देने थे, केवल 9.41 करोड़ रुपए ही दिए हैं। एनएच-150ए मस्की और सिंधनूर बायपास योजना के जमीन अधिग्रहण के लिए 66.4 करोड़ रुपए की जरूरत थी, राज्य से मात्र 14 करोड़ रुपए मिले। एनएच-69 चिंतामणि बायपास के लिए 215 किसानों को 123 करोड़ रुपए मुआवजा दिया गया है परन्तु 210 किसानों का मुआवजा अब भी अटका है। केंद्र सरकार को राज्य से 112.50 करोड़ रुपए की प्रतीक्षा है। एनएच-367 कुकनूर-यलबुर्गा-गजेंद्रगढ़ बायपास के लिए 45.05 करोड़ रुपए में से राज्य ने केवल 11 करोड़ रुपए दिए।
एनएच-748ए बेलगावी-हुनगुंद-रायचूर के बीच 227 किमी विस्तार पर किसानों ने जमीन देने से इनकार किया है इसके चलते 6,629 करोड़ रुपए की योजना धीमी रफ्तार से चल रही है।
रेल परियोजनाओं पर 50-50 खर्च, भूमि अभाव से शिवमोग्गा-हरिहर रेलमार्ग रुका हुआ है। एनएच-48 संकेश्वर बायपास (निप्पाणी) के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवजा अभी बंट रहा है। एनएच-75 हासन-मारणहल्ली में भूस्खलन रोकने की योजना के लिए 2.28 एकड़ जमीन अधिग्रहण नहीं हुआ। एनएच-69 और 73 तुमकूर-शिवमोग्गा के किसानों ने अतिरिक्त मुआवजा मांगा, विवाद सुलझा नहीं।
लोकसभा में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कर्नाटक में रेल परियोजनाओं को केंद्र और राज्य सरकार के बीच 50:50 खर्च साझेदारी के आधार पर मंजूरी दी गई है परन्तु शिवमोग्गा-हरिहर नई रेलमार्ग परियोजना भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण अटकी हुई है। लोकसभा में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से आवश्यक भूमि उपलब्ध न कराने से इस परियोजना का कार्य स्थगित पड़ा है।
रेलवे परियोजनाएं अधर में
केंद्र सरकार ने कर्नाटक के लिए कई रेलवे योजनाएं मंजूर किए थे परन्तु राज्य सरकार जमीन अधिग्रहण कर केंद्र को सौंपने में विफल रहा।
शिवमोग्गा-हरिहर (79 किमी) के लिए 488 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित नहीं होने से परियोजना रुका है।
बेलगावी-धारवाड़ (73 किमी) के लिए 531 हेक्टेयर जमीन की जरूरत, अधिग्रहण अधूरा है।
वाइटफील्ड-कोलार (53 किमी) के लिए 337 हेक्टेयर जमीन अब तक नहीं मिली।
हासन-बेलूर (27 किमी) के लिए 206 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित नहीं हुई।
शिवमोग्गा-राणेबेन्नूर (96 किमी) के लिए 559 हेक्टेयर जमीन चाहिए, 226 हेक्टेयर ही अधिग्रहित हुआ।
नतीजा यह है कि कर्नाटक की सभी पांच नई रेलवे परियोजनाएं अभी रुकी हुई हैं और राष्ट्रीय राजमार्ग कार्य भी ठप पड़े हैं।
