पॉक्सो मामलों में पीडि़त बच्चों के लिए कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता सुनिश्चित
मेंगलूरु. कानून सेवा प्राधिकरण ने बच्चों से जुड़े मामलों में पीडि़त बच्चों और उनके परिवारों को पूरक कानूनी सहायता और मार्गदर्शन देने के लिए पुलिस थानों में अर्ध-कालिक कानूनी स्वयंसेवकों (पैरालीगल वॉलंटियर्स) को ‘सपोर्ट पर्सन’ के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और लागू करने की पहल
पॉक्सो अधिनियम की धारा 39 के अनुसार बच्चों और अभिभावकों को उचित मार्गदर्शन व सुरक्षा देना अनिवार्य है।
कई राज्यों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, इसलिए राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण ने दिसंबर में सभी जिलों को इसे लागू करने का निर्देश दिया।
कर्नाटक में स्थिति
राज्य के 1,099 पुलिस थानों में फिलहाल केवल 50 थानों में ही सपोर्ट पर्सन नियुक्त हैं।
दक्षिण कन्नड़ जिले में 163 और उडुपी जिले में 88 स्वयंसेवकों की नियुक्ति प्रक्रिया जारी है।
नियुक्ति वार्षिक आधार पर होती है और हर वर्ष नए स्वयंसेवकों का चयन किया जाता है।
कौन बन सकता है सपोर्ट पर्सन?
कानून के छात्र, शिक्षक, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता या सामान्य स्नातक छात्र आवेदन कर सकते हैं।
शर्तें
समाजशास्त्र, मनोविज्ञान या बाल विकास में स्नातकोत्तर डिग्री, या बच्चों की शिक्षा, विकास या सुरक्षा के क्षेत्र में कम से कम तीन वर्षों का अनुभव।
नियुक्ति अवधि: तीन वर्ष, प्रदर्शन के आधार पर विस्तार संभव।
सपोर्ट पर्सन के प्रमुख कार्य
पीडि़त बच्चों और परिवारों को सुरक्षा व मानसिक सहारा देना।
बच्चों की शिक्षा जारी रखने में सहयोग करना।
धमकी या जोखिम की स्थिति की निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित करना।
आवश्यकतानुसार बच्चों को सुरक्षित संस्थाओं में भेजना।
बच्चों और परिवार से नियमित संपर्क रखना।
सभी जानकारी को गोपनीय रखना।
बयान दर्ज कराने, चिकित्सकीय जांच और पूछताछ में सहयोग देना।
दक्षिण कन्नड़ जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष बसवराज ने कहा कि यह पहल बच्चों की सुरक्षा और न्याय प्रक्रिया में उनके तथा उनके परिवारों के मानसिक बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
