एनडब्ल्यूकेआरटीसी में 330 नई बसें शामिलकबाड़ बन कर खड़ी उत्तर-पश्चिम कर्नाटक सडक़ परिवहन निगम की बस।

289 पुरानी बसें स्क्रैप, शक्ति योजना से बढ़ी चुनौती

हुब्बल्ली. उत्तर-पश्चिम कर्नाटक सडक़ परिवहन निगम (एनडब्ल्यूकेआरटीसी) ने अपने बेड़े को नया रूप देने की तैयारी शुरू कर दी है। वर्ष 2025-26 के अंत तक 289 पुरानी बसें स्क्रैप में भेजी जाएंगी और उनकी जगह 330 नई बसें शामिल की जाएंगी। निगम अधिकारियों के अनुसार नई बसों के चेसिस निरीक्षण का कार्य पूरा हो चुका है और 1 फरवरी से विभिन्न डिपो को बसों की आपूर्ति शुरू होगी।

2026-27 में और बढ़ेगी चुनौती

अधिकारियों ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में 15 वर्ष पूरे कर चुकी 550 बसें स्क्रैप में चली जाएंगी। इसी दौरान नई बसों की खरीद और शक्ति योजना के तहत बढ़ती यात्री संख्या की मांग को पूरा करना निगम के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा।

दिसंबर तक 266 बसें स्क्रैप

अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में दिसंबर अंत तक 266 बसें पहले ही स्क्रैप में भेजी जा चुकी हैं। नई बसें तो आ रही हैं, लेकिन अतिरिक्त बसों और कर्मचारियों की नियुक्ति फिलहाल संभव नहीं हो पा रही है।

बसों और कर्मचारियों की भारी जरूरत

निगम के अधिकारियों ने कहा कि शक्ति योजना के कारण यात्रियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके अनुपात में और बसें तथा चालक-परिचालक जरूरी हैं। हर साल कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं और पुरानी बसें स्क्रैप में जा रही हैं, जिससे खाली स्थानों को भरना मुश्किल हो रहा है।

ग्रामीण मार्गों पर दबाव

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार जिन ग्रामीण मार्गों पर पहले दो बसें चलती थीं, वहां अब कम से कम चार बसों की जरूरत है। जिन मार्गों पर चार बसें थीं, वहां सात बसों की आवश्यकता महसूस हो रही है। पास के गांवों से आने वाले यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बसों का संचालन निगम के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

पुराने संसाधनों से ज्यादा सेवा

निगम मौजूदा बुनियादी ढांचे के सहारे ही अधिकतम यात्रियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध करा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि यात्री मांग के अनुरूप बसों और आधारभूत सुविधाओं में वृद्धि की जाए, तो निगम की आय में भी बढ़ोतरी संभव है।

शक्ति योजना से बढ़ी मांग

शक्ति योजना लागू होने के बाद महिला यात्रियों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। पहले लोग निजी वाहनों का उपयोग करते थे और सरकारी बसें खाली चलती थीं, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। जिला मुख्यालयों और प्रमुख तालुक केंद्रों के आसपास बसों की कमी साफ दिखाई दे रही है।

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By Bharat Ki Awaz

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