आध्यात्मिकता के नाम पर सामूहिक आत्मत्याग की कोशिश नाकाम, प्रशासन ने दी चेतावनी
अधिकारियों की तत्परता से 21 लोगों की जान बची, धारा 144 लागू
बेलगावी. उत्तर कर्नाटक में अक्सर ऐसी घटनाएं घटित होती रहती हैं, जो पूरे राज्य को हिला देती हैं। इसी बीच यह घटना फिर से इस सवाल को खड़ा कर रही है कि क्या आज भी अंधविश्वास जिंदा है?
जी हां, अंधविश्वास का शिकार होने जा रहे एक परिवार को अब अधिकारियों ने बचा लिया है। इस तरह एक बड़ी अनहोनी टल गई है। यह घटना चिक्कोडी के अनंतपुर गांव में सामने आई है। श्रद्धालु कह रहे थे कि परमात्मा आएंगे और प्राण ले जाएंगे।
बताया गया कि 8 सितंबर को आत्मबलिदान के लिए उत्तर प्रदेश से श्रद्धालु यहां आए थे। अनंतपुर गांव के इरकर परिवार के 4 लोगों समेत कुल 21 लोग आत्मत्याग करने को तैयार थे। ये सभी संत रामपाल के अनुयायी बताए गए हैं। पुस्तक पढऩे और प्रवचन सुनने के बाद इन्होंने प्राण त्यागने का निर्णय लिया था।
इरकर परिवार के सदस्य तुकाराम, सावित्री, रमेश और वैश्णवी आत्मबलिदान करने वाले भक्तों में शामिल थे। जैसे ही अधिकारियों को यह जानकारी मिली, तो चिक्कोडी एसी सुभाष संपगावी के नेतृत्व में टीम ने गांव का दौरा किया और लोगों को समझाने का काम किया।
साथ ही, आत्मबलिदान की तैयारी कर रहे श्रद्धालुओं को स्वामी की ओर से धार्मिक दीक्षा दी गई। अधिकारियों ने कानूनी चेतावनी भी दी और इरकर परिवार के घर के आसपास धारा 144 लागू की गई। भोजन त्याग चुके भक्तों को भोजन कराया गया। सभी लोग आध्यात्मिकता के नाम पर सांसारिक जीवन त्यागने को तैयार थे।
वर्तमान में मौके पर डॉक्टरों समेत अधिकारियों की टीम मौजूद है। उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं को अधिकारियों ने वापस भेज दिया है।