युद्ध के बीच 21 दिन समंदर में फंसा भारतीय जहाज
होर्मुज जलडमरूमध्य में मिसाइल-ड्रोन हमलों के बीच फंसा एलपीजी जहाज
भारतीय नौसेना की सुरक्षा में सुरक्षित लौटे नाविक
मेंगलूरु. ईरान-इजराइल-अमरीका तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे एक एलपीजी जहाज पर तैनात मेंगलुरु के एक मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) ने 21 दिनों तक चले खतरनाक सफर का अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच हर पल मौत का डर बना रहा, लेकिन अंतत: भारतीय नौसेना की मदद से सुरक्षित भारत लौटना संभव हो सका।
हमलों के बीच लोडिंग, हर पल खतरा
नाविक के अनुसार, 28 फरवरी को हम कुवैत में थे, तभी अचानक मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू हो गए। हमारा जहाज 40 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लोड करने वाला था, लेकिन 20 हजार टन भरते ही हमें बंदरगाह से बाहर भेज दिया गया।
बाद में दोबारा लौटकर लोडिंग पूरी की गई, लेकिन उसी दौरान पास खड़े जहाज पर ड्रोन हमला हुआ। चारों ओर हमले और जवाबी कार्रवाई जारी थी।
होर्मुज बंद, अनिश्चितता और भय का माहौल
उन्होंने बताया कि जब जहाज होर्मुज की ओर बढ़ा, तब पता चला कि जलडमरूमध्य बंद कर दिया गया है। जहाज को शारजाह की ओर मोड़ दिया गया, जहां दो महीने का राशन जमा किया गया। आगे क्या होगा, यह किसी को पता नहीं था। हम अबू मूसा द्वीप के पास रुके थे, जहां लगातार संघर्ष जारी था।
समंदर में 15 दिन इंतजार, मौत की खबरें
उन्होंने बताया कि होर्मुज के पास जहाज को 10 मील दूर रोक दिया गया और अनुमति का इंतजार किया गया। हम 15 दिन समुद्र में ही रुके रहे। इसी दौरान पास के एक जहाज के भारतीय कप्तान की दिल का दौरा पडऩे से मौत हो गई। युद्ध के कारण समय पर मदद नहीं मिल सकी। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान 25 से अधिक जहाजों पर हमले हुए और कई भारतीय नाविकों की जान गई।
समुद्र में बिछे थे ‘सी माइन’, हर कदम पर खतरा
नाविक ने बताया कि ईरान ने समुद्र में ‘सी माइन’ यानी विस्फोटक बिछा रखे थे। हमें एक संकरे सुरक्षित रास्ते से गुजरने के निर्देश दिए गए। जरा सी चूक से जहाज उड़ सकता था। इस बीच एक और हत्या की घटना के बाद 10 दिन तक कोई जहाज आगे नहीं बढ़ सका।
भारतीय नौसेना बनी सहारा
नाविक ने बताया कि आखिरकार मस्कट तक पहुंचने के बाद भारतीय नौसेना के युद्धपोतों ने सुरक्षा दी। नौसेना के जहाजों की निगरानी में हम खतरनाक क्षेत्र पार कर 27 मार्च को गुजरात के कांडला बंदरगाह पहुंचे। फिलहाल जहाज मुंबई में है और जल्द ही मेंगलूरु पहुंचेगा।
पहली बार ऐसा भयावह अनुभव
15 वर्षों के करियर में 21 से अधिक बार होर्मुज पार कर चुके इस नाविक ने कहा कि ऐसा खतरनाक अनुभव पहले कभी नहीं हुआ। यह बेहद चुनौतीपूर्ण और डरावना था।
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