वैकल्पिक भूखंड की मांग, 20 वर्षों से न्याय के लिए संघर्ष
हुब्बल्ली. शहर के हवाई अड्डा विस्तार के लिए भूमि देने वाले प्रभावित परिवारों को अब तक वैकल्पिक भूखंड उपलब्ध नहीं कराए जाने के विरोध में हुब्बल्ली-धारवाड़ शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) कार्यालय के सामने प्रदर्शन हुआ। सैकड़ों की संख्या में एकत्रित विस्थापितों ने भजन और गीतों के माध्यम से सरकार से अपनी मांगें पूरी करने का आग्रह किया।
529 परिवारों ने दी थी भूमि
विस्थापित संघ के अध्यक्ष रघोत्तम कुलकर्णी ने कहा कि वर्ष 2007 में सरकार के आश्वासन पर 529 परिवारों ने कुल 710 एकड़ भूमि हवाई अड्डा विस्तार के लिए दी थी। इसके बाद हुडा ने वर्ष 2008 में 83 और 2016 में 70 लाभार्थियों को भूखंड दिए, लेकिन शेष परिवारों को अब तक कोई लाभ नहीं मिला।
मुआवजे में भेदभाव का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ लाभार्थियों को केआईएडीबी की ओर से 600 रुपए प्रति वर्ग फुट मुआवजा दिया गया, जबकि बाद में उनसे 224 रुपए वसूल कर बैरीदेवरकोप्पा में भूखंड दिए गए। वहीं, उसी सर्वे नंबर के अन्य लाभार्थियों को केवल 450 रुपए प्रति वर्ग फुट मुआवजा देकर भूखंड के लिए 485 रुपए निर्धारित किए गए। इसे उन्होंने स्पष्ट भेदभाव बताया।
न्यायालय को गलत जानकारी का आरोप
संघ ने आरोप लगाया कि शहरी विकास प्राधिकरण ने सरकार और उच्च न्यायालय को गलत जानकारी दी, जिसके कारण शेष परिवारों को भूखंड नहीं मिल पाए। उन्होंने कहा कि हम पिछले 20 वर्षों से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि हमारी पीड़ा सुनने को तैयार नहीं हैं। विस्थापितों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र पुनर्वास नहीं हुआ तो दी गई भूमि वापस ली जाएगी।
बैठक का आश्वासन
हुडा अध्यक्ष शाकीर सनदी ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए कहा कि इस विषय पर 24 जनवरी को बैठक आयोजित कर चर्चा की जाएगी और कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रभावितों को भूखंड उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
विस्थापितों का कहना है कि अब न्याय और पुनर्वास के लिए निर्णायक कदम उठाना ही होगा।
प्रदर्शन में एस.ए. जहागीरदार, आई.बी. चडिहाळ, एम.बी. रायकर, जी. शिरूर, आर.एम. अन्वेकर, गुरुनाथ एलिवाळ, बसवराज खानापुर, रामू हबीब, हीरा सोलंकी, विनायक सोलंकी, राघवेंद्र हबीब, लक्ष्मण खानापुर, दीपा सोलंकी, पार्वती सोलंकी, गीता सोलंकी और महादेवी सहित अनेक लोग उपस्थित थे।

