दांडेेली मातृ-शिशु अस्पताल में गरीबों से पैसे लेने पर जांच की मांग तेज
दांडेेली (उत्तर कन्नड़). दांडेेली के मातृ एवं शिशु (जच्चा-बच्चा) अस्पताल में प्रसव के लिए आई गरीब महिलाओं से पैसे लेने के आरोप ने तूल पकड़ लिया है। मामले के सामने आते ही क्षेत्र के विधायक आर.वी. देशपांडे ने अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों को फटकार लगाई और कड़ी नाराजगी जताई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त मिलने वाली प्रसव सेवाओं के लिए भी मरीजों से पैसे वसूले जा रहे हैं। सूचना मिलते ही विधायक देशपांडे ने मौके पर पहुंचकर संबंधित डॉक्टरों से सीधे सवाल किया कि “गरीब मरीजों से आखिर कितना पैसा लिया गया?”
इस पर डॉक्टरों ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने खुद पैसे नहीं मांगे, बल्कि मरीजों ने “स्वेच्छा से” दिए, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। इस तर्क से असंतुष्ट देशपांडे ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गरीबों से किसी भी रूप में पैसा लेना अस्वीकार्य है। सरकारी सेवा को पैसे के बदले देना पूरी तरह गलत है।
“स्वेच्छा से पैसा” तर्क पर सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि मरीज अक्सर भय या असुरक्षा के कारण पैसे देने को मजबूर होते हैं, ऐसे में इसे स्वेच्छा कहना उचित नहीं है। यह नैतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से गंभीर मामला है।
सरकारी अस्पतालों में इस प्रकार की वसूली भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों के तहत दंडनीय अपराध है और चिकित्सा आचार संहिता के भी खिलाफ है।
घटना के बाद आम जनता में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब गरीबों के लिए बने अस्पतालों में भी पैसे मांगे जाएंगे, तो वे इलाज के लिए कहां जाएंगे?
मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है, साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करने की जरूरत बताई जा रही है।

