घाट सेक्शन में विद्युतीकरण अंतिम चरण में
वंदे भारत के लिए भी ट्रैक अपग्रेड
मेंगलूरु. मंगलूरु और बेंगलूरु के बीच रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। दोनों शहरों के बीच जल्द ही पूरी तरह विद्युत चालित ट्रेनें चलने वाली हैं। इसके साथ ही राज्य की अधिकांश रेल सेवाएं इलेक्ट्रिक इंजनों पर स्थानांतरित हो जाएंगी।
घाट सेक्शन का विद्युतीकरण अंतिम चरण में
मेंगलूरु-बेंगलूरु रेल मार्ग के सकलेशपुर-सुब्रह्मण्य रोड घाट सेक्शन में शेष 55 किलोमीटर लंबे हिस्से का विद्युतीकरण कार्य अब अंतिम चरण में है। यह कार्य पूरा होते ही बेंगलूरु-मेंगलूरु-कारवार के बीच चलने वाली यात्री और मालगाडिय़ां पूर्णत: इलेक्ट्रिक इंजनों से संचालित होंगी। वर्तमान में इस मार्ग पर घाट क्षेत्र में अभी भी डीजल इंजनों का उपयोग किया जा रहा है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार मेंगलूरु-सुब्रह्मण्य रोड और सकलेशपुर-चिक्कबानावर-अरसीकेरे-मैसूरु खंड पहले ही विद्युतीकृत हो चुके हैं। केवल घाट का हिस्सा शेष था, जिसे अब पूरा किया जा रहा है।
आधे रास्ते से इलेक्ट्रिक इंजन
फिलहाल केएसआर बेंगलूरु-कन्नूर एक्सप्रेस (16511/12) और एसएमवीटी बेंगलूरु-मुरुडेश्वर एक्सप्रेस (16585/586) मेंगलूरु सेंट्रल में इंजन बदलकर आंशिक रूप से इलेक्ट्रिक इंजन का उपयोग कर रही हैं। वहीं केएसआर बेंगलूरु-कारवार पंचगंगा एक्सप्रेस (16595/596) इंजन परिवर्तन की सुविधा न होने के कारण अभी भी पूरी तरह डीजल इंजन से चल रही है। इसके विपरीत कोंकण रेलवे मार्ग पहले से ही पूर्णत: विद्युतीकृत है।
वंदे भारत के लिए तैयारी
रेल मंत्रालय ने चिक्कबानावर-मेंगलूरु मार्ग को वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन के अनुकूल बनाने के निर्देश दक्षिण पश्चिम रेलवे को दिए हैं। इसके तहत ट्रैक और सिग्नल प्रणाली को उन्नत किया जा रहा है ताकि तेज रफ्तार ट्रेनों का सुरक्षित संचालन संभव हो सके।
दिन की ट्रेन सेवाएं बहाल
विद्युतीकरण कार्य के चलते 31 मई से स्थगित की गई दिनकालीन ट्रेन सेवाएं अब पुन: शुरू हो रही हैं।
साप्ताहिक यशवंतपुर-मेंगलूरु गोमटेश्वर एक्सप्रेस (16575/76) ने मंगलवार से परिचालन शुरू कर दिया है।
बुधवार को यशवंतपुर-मेंगलूरु/कारवार साप्ताहिक एक्सप्रेस (16515/16) भी फिर से दौड़ी।
शनिवार को मेंगलूरु-यशवंतपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस (16539/40) का परिचालन बहाल होगा।
लाभ और प्रभाव
रेलवे का कहना है कि विद्युतीकरण पूरा होने से यात्रा समय में कमी आएगी। ईंधन की बचत होगी। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। तटीय कर्नाटक और राजधानी बेंगलूरु के बीच रेल संपर्क और अधिक सुदृढ़ होगा।
इस परियोजना से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी बल्कि मालगाडिय़ों के संचालन में भी तेजी आएगी। इससे तटीय क्षेत्र और राजधानी के बीच व्यापारिक गतिविधियों को नया बल मिलेगा।

