कम बुवाई से बाजार में बंपर भाव
जिले में उत्पादन घटा, एपीएमसी में प्रति क्विंटल 4,000 से 5,000 रुपए तक मिल रही कीमत
रायचूर. उत्तर कर्नाटक के प्रमुख खाद्यान्नों में शामिल सफेद ज्वार की आवक रायचूर जिले में शुरू हो गई है। इस बार बुवाई कम होने के कारण बाजार में ज्वार को बंपर कीमत मिल रही है, जिससे किसानों में उत्साह देखा जा रहा है।
रायचूर की सफेद ज्वार पड़ोसी जिलों और अन्य राज्यों में भी प्रसिद्ध है। हालांकि हाल के वर्षों में कई किसानों ने ज्वार की जगह कपास और अन्य फसलों की खेती शुरू कर दी थी। इसके अलावा तुंगभद्रा जलाशय से इस बार गर्मी में दूसरी फसल के लिए पानी उपलब्ध नहीं होने से भी ज्वार की खेती सीमित क्षेत्र में हुई।
वर्ष 2024-25 में जिले में लगभग 7163 हेक्टेयर क्षेत्र में ज्वार की बुवाई हुई थी। वर्तमान खरीफ सीजन में कृषि विभाग ने लगभग 7100 हेक्टेयर लक्ष्य रखा था, जिसमें से करीब 6483 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई। इसमें सिंधनूर, लिंगसुगूर, मानवी, मस्की और अन्य तालुकों में खेती की गई।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ज्वार की खेती में आधुनिक मशीनों की कमी और कटाई के लिए मजदूरों पर निर्भरता भी किसानों के लिए चुनौती है। वहीं चना जैसी फसल कम समय में तैयार होने और मशीन से कटाई की सुविधा के कारण किसान उसकी ओर अधिक झुक रहे हैं।
बुवाई कम होने के कारण एपीएमसी बाजार में सफेद ज्वार की कीमत 4,000 से 5,000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है, जबकि हाईब्रिड ज्वार करीब 3,500 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही है।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक प्रकाश चौहान ने बताया कि जिले में ज्वार की खेती को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।

