चित्रदुर्ग डीसी कार्यालय में घोटाले का प्रयास नाकाम
डेटा एंट्री ऑपरेटर और एफडीए मुख्य आरोपी
चित्रदुर्ग. जिले में जिलाधिकारी (डीसी) और अपर जिलाधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर लगभग 15 लाख रुपए की राशि जारी कराने की कोशिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जिससे जिला प्रशासनिक हलकों में हडक़ंप मच गया है।
गिरफ्तार आरोपियों में जिलाधिकारी कार्यालय में संविदा आधार पर कार्यरत डेटा एंट्री ऑपरेटर सैयद सादिक और प्रथम श्रेणी सहायक (एफडीए) वेंकटेश मुख्य आरोपी बताए जा रहे हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि इन दोनों के नेतृत्व में एक समूह ने यह साजिश रची थी।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने जिला शहरी विकास प्रकोष्ठ (सीएलटीसी) के आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय बिल के नाम पर लगभग 15 लाख रुपए जारी कराने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। 12 मार्च की सुबह आरोपियों ने कार्यालय में प्रवेश कर पहले अपर जिलाधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर की नकल की और बाद में जिलाधिकारी टी. वेंकटेश के हस्ताक्षर भी फर्जी तरीके से तैयार कर दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया।
इसके बाद आरोपियों ने ऑनलाइन प्रणाली में ऐसा दर्शाया कि जैसे जिलाधिकारी ने भुगतान को मंजूरी दे दी हो। इसी आधार पर ‘वीएमएच एंटरप्राइजेज’ नामक संस्था को राशि जारी करने का आदेश पत्र भी तैयार कर लिया गया।
हालांकि जब यह फाइल जिला कोषागार विभाग पहुंची तो अधिकारियों को संदेह हुआ। दस्तावेजों की जांच के दौरान फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों के माध्यम से धन निकालने की कोशिश का खुलासा हो गया।
इस संबंध में जिला योजना निदेशक रेश्मा हानगल की शिकायत पर चित्रदुर्ग नगर थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने सैयद सादिक, वेंकटेश, इंजीनियर विनय शर्मा, बसवराज और विजय को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
