‘किसी भी बच्चे को श्रवण दोष के कारण पीछे न रहना पड़े’
समय पर जांच पर जोर
कोप्पल. शहर में विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर सवोर्दय ग्रामीण औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में कान जांच एवं जागरूकता शिविर आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में जिला असंक्रामक रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. प्रकाश एच. ने कहा कि कोई भी बच्चा श्रवण दोष या बहरापन के कारण भविष्य में पीछे न रह जाए, इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अभी से कानों के स्वास्थ्य के प्रति सजग होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कान पंचेंद्रियों में अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। कान में लकड़ी या अन्य वस्तु डालना, तेल डालना अथवा झोलाछाप चिकित्सकों से मैल निकलवाना खतरनाक हो सकता है। दूषित पानी में तैरने से बचना चाहिए और चिकित्सकीय परामर्श के बिना कान में कोई दवा नहीं डालनी चाहिए। दो वर्ष से कम आयु के बच्चों में श्रवण दोष पाए जाने पर सरकार की ओर से नि:शुल्क शल्य चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध है, जिसका लाभ अभिभावकों को अवश्य लेना चाहिए।
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अविनाश ने नवजात शिशुओं की कान देखभाल तथा राष्ट्रीय श्रवण दोष नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध सुविधाओं पर विशेष व्याख्यान दिया।
संस्थान के प्राचार्य निंगप्पा गद्दिगेरी ने कहा कि ऐसे शिविर विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं और यहां प्राप्त जानकारी को वे अपने गांवों में पहुंचाकर जनजागरूकता बढ़ाएं।
कार्यक्रम में जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी शिवानंद वी.पी., ऑडियोलॉजिस्ट बिंदु, नगर स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी श्रीनिवास, स्वास्थ्य निरीक्षण अधिकारी लोहित, आशा कार्यकर्ता सहित अन्य मौजूद थे।

