रेड्डी से लिंगायत वर्चस्व तक, फिर अहिंदा समीकरण; अब मेटी बनाम चरंतिमठ की टक्कर
बागलकोट। बागलकोट विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर उपचुनाव की ओर बढ़ रहा है। यह इस क्षेत्र का तीसरा उपचुनाव है, जबकि पूरे जिले में अब तक कुल नौ उपचुनाव हो चुके हैं। इस सीट का राजनीतिक इतिहास कई दिलचस्प मोड़ों और सामाजिक समीकरणों का साक्षी रहा है।
रेड्डी वर्चस्व से शुरुआत
1957 में मैसूर राज्य के दौर से लेकर 1978 तक इस क्षेत्र में रेड्डी समुदाय का दबदबा रहा। इस दौरान बी.टी. मुरनाल लगातार प्रमुख नेता रहे और कई बार विधायक चुने गए। 1962 में उन्होंने तत्कालीन नेता एस. निजलिंगप्पा को विधानसभा में लाने के लिए अपनी सीट तक त्याग दी थी, जो उस दौर की बड़ी राजनीतिक घटना मानी जाती है।
लिंगायत नेतृत्व का उदय
1978 के बाद राजनीतिक समीकरण बदले और लिंगायत समुदाय का प्रभाव बढ़ा। परप्पा कल्लिगुड्ड ने सत्ता परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया। इसके बाद 1980 और 90 के दशक में जी.वी. मंटूर और अजयकुमार सरनायक जैसे नेताओं ने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
उपचुनाव और नई राजनीति
1997 में अजयकुमार सरनायक के इस्तीफे के बाद उपचुनाव हुआ, जिसमें पी.एच. पूजार ने जीत दर्ज की। उन्होंने 1999 में भी अपनी जीत दोहराई। इसके बाद 2004 और 2008 में वीरन्ना चरंतिमठ ने जीत हासिल कर अपना प्रभाव मजबूत किया।
अहिंदा समीकरण की एंट्री
2013 में एच.वाई. मेटी ने जीत दर्ज कर इस सीट पर नया इतिहास रचा। उन्होंने पारंपरिक जातीय समीकरणों को तोड़ते हुए अहिंदा (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) आधार पर जीत हासिल की। 2018 में चरंतिमठ फिर जीते, लेकिन 2023 में मेटी ने वापसी की।
मेटी के निधन से उपचुनाव
2025 में एच.वाई. मेटी के निधन के बाद यह सीट खाली हुई और अब उपचुनाव हो रहा है। इस बार मुकाबला उनके पुत्र उमेश मेटी और भाजपा के वरिष्ठ नेता वीरन्ना चरंतिमठ के बीच है।
जिले में नौवां उपचुनाव
बागलकोट जिले में यह नौवां उपचुनाव है। जमखंडी, गुलेदगुड्डा और हुनगुंद विधानसभा क्षेत्रों में भी दो-दो बार उपचुनाव हो चुके हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस बार मतदाता किसे अपना प्रतिनिधि चुनते हैं और बागलकोट की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
बागलकोट विधानसभा चुनाव का इतिहास
वर्ष — विधायक — पार्टी
1957 — बी.टी. मुरनाल — कांग्रेस
1962 — बी.टी. मुरनाल — कांग्रेस
1968 — बी.टी. मुरनाल — कांग्रेस
1972 — बी.टी. मुरनाल — कांग्रेस
1978 — परप्पा कल्लिगुड्ड — कांग्रेस
1983 — जी.वी. मंटूर — जनता पार्टी
1985 — जी.वी. मंटूर — जनता पार्टी
1989 — अजयकुमार सरनायक — जनता दल
1994 — अजयकुमार सरनायक — जनता दल
1997 — पी.एच. पूजार — भाजपा/एनडीए
1999 — पी.एच. पूजार — भाजपा
2004 — वीरन्ना चरंतिमठ — भाजपा
2008 — वीरन्ना चरंतिमठ — भाजपा
2013 — एच.वाई. मेटी — कांग्रेस
2018 — वीरन्ना चरंतिमठ — भाजपा
2023 — एच.वाई. मेटी — कांग्रेस
मुख्य बिंदु (Quick Insights)
– सबसे लंबा वर्चस्व: बी.टी. मुरनाल (1957–1972)
– राजनीतिक बदलाव: 1980 में कांग्रेस से जनता पार्टी/दल
– भाजपा का उदय: 1997 के बाद मजबूत पकड़
– कांग्रेस की वापसी: 2013 और 2023 में एच.वाई. मेटी
– उपचुनाव: 1997, 2025 (अब तीसरा उपचुनाव)
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