अघनाशिनी तट पर ‘अप्पेमिडी’ संरक्षण की मुहिमउत्तर कन्नड़ जिले के अघनाशिनी नदी तट पर दुर्लभ ‘अप्पेमिडी’ आम प्रजातियों के संरक्षण के लिए पदयात्रा करते पर्यावरण प्रेमी।

पर्यावरण प्रेमियों की अनोखी पदयात्रा शुरू

दुर्लभ आम प्रजातियों के संरक्षण के लिए 3 दिन की यात्रा

जैव विविधता विरासत क्षेत्र घोषित करने की पहल

सिरसी. उत्तर कन्नड़ जिले के अघनाशिनी नदी तट पर दुर्लभ ‘अप्पेमिडी’ आम प्रजातियों के संरक्षण के लिए पर्यावरण प्रेमियों ने एक अनोखी तीन दिवसीय पदयात्रा शुरू की है। ‘वृक्षलक्ष आंदोलन’ और स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं की इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र की जैव विविधता को संरक्षित करना और उसे पहचान दिलाना है।

वृक्ष पूजन से हुआ शुभारंभ

पदयात्रा की शुरुआत सरकुली होले के पास स्थित एक विशाल अप्पेमिडी वृक्ष के नीचे वृक्ष पूजन के साथ की गई। इसके बाद दल ने सबकारू, मुच्चुली, नाडगुली, बालगारा और मारिगद्दे जैसे गांवों से होकर लगभग 12 किलोमीटर की यात्रा शुरू की, जहां विभिन्न किस्मों के अप्पेमिडी आम का अध्ययन किया जा रहा है।

जैव विविधता संरक्षण की पहल

पदयात्रा के दौरान टीम अघनाशिनी घाटी में मौजूद वनस्पतियों और पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण कर रही है। टीम के अध्यक्ष अनंत हेगड़े ने बताया कि इस सर्वेक्षण के आधार पर क्षेत्र को “जैव विविधता विरासत स्थल” घोषित करने के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर संबंधित प्राधिकरण को सौंपी जाएगी।

विकास परियोजनाओं से खतरा

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नदी जोडऩे और बांध निर्माण जैसी परियोजनाओं से इस क्षेत्र की अनूठी वनस्पतियां, खासकर अप्पेमिडी प्रजाति, विलुप्ति के कगार पर पहुंच सकती हैं। ऐसे में संरक्षण के प्रयास बेहद जरूरी हो गए हैं।

जनभागीदारी से बढ़ी ताकत

इस पदयात्रा में पर्यावरणविदों के साथ किसान और स्थानीय महिलाएं भी उत्साहपूर्वक भाग ले रही हैं। 2002 के जैव विविधता अधिनियम के तहत इस क्षेत्र के संरक्षण की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।

 

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By Bharat Ki Awaz

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