जनगणना की तैयारी तेज, शिक्षकों पर दोहरी जिम्मेदारी का दबावसांदर्भिक फोटो।

दक्षिण कन्नड़-उडुपी में सूची तैयार

परीक्षा व बीएलओ ड्यूटी के बीच बढ़ी चिंता

मेंगलूरु. केंद्र सरकार की बहुप्रतीक्षित जनगणना की तैयारियां तेज हो गई हैं। दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिला प्रशासन की ओर से गणनाकारों के रूप में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की सूची तैयार की जा रही है। इस बीच, परीक्षा और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों के चलते शिक्षकों में असमंजस और चिंता बढ़ गई है।

दोनों जिलों में करीब 12 हजार शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से लगभग 450 शिक्षक पहले से ही बीएलओ (मतदाता सूची संशोधन) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। हालांकि फिलहाल बीएलओ ड्यूटी वाले शिक्षकों को जनगणना से अलग रखा गया है, लेकिन कर्मचारियों की कमी होने पर उन्हें भी शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

परीक्षा और जनगणना का दबाव

इस समय पीयूसी और एसएसएलसी परीक्षाएं तथा मूल्यांकन कार्य जारी हैं। ऐसे में शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि परीक्षा कार्य में लगे शिक्षकों को जनगणना से छूट देनी चाहिए। लेकिन कई शिक्षकों को मौखिक रूप से तैयार रहने के निर्देश दिए जाने से भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

पहली बार नई व्यवस्था

इस बार प्राथमिक व हाईस्कूल शिक्षकों को गणनाकार और पीयूसी/कॉलेज शिक्षकों को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करने की योजना है। जरूरत पडऩे पर ‘सी ग्रुप’ कर्मचारियों को भी शामिल किया जा सकता है।

डिजिटल होगी जनगणना

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। नागरिकों को ‘सेल्फ एन्यूमरेशन’ के माध्यम से 16 भाषाओं में ऑनलाइन जानकारी देने का विकल्प मिलेगा। मास्टर ट्रेनर और चार्ज अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि जल्द ही गणनाकारों का प्रशिक्षण भी शुरू होगा।

संगठनों की मांग

शिक्षक संगठनों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि उन्हें उनके कार्यक्षेत्र के भीतर ही ड्यूटी दी जाए और बीएलओ की जिम्मेदारी निभा रहे शिक्षकों को जनगणना कार्य से मुक्त रखा जाए।

दक्षिण कन्नड़ के अपर जिलाधिकारी के. राजू ने स्पष्ट किया कि फिलहाल बीएलओ ड्यूटी वाले शिक्षकों को शामिल नहीं किया गया है और परीक्षा कार्य समाप्त होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

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By Bharat Ki Awaz

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