एमसीएफ का नाम बदलना मेंगलूरु की अस्मिता पर हमलाएमएलसी आइवन डिसोजा।

पुराना नाम तत्काल बहाल किया जाए, नहीं तो तेज होगा आंदोलन

एमएलसी आइवन डिसोजा ने दी चेतावनी

मेंगलूरु. शहर के ऐतिहासिक औद्योगिक प्रतिष्ठान मेंगलूरु केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स (एमसीएफ) का नाम बदलकर पारादीप फॉस्फेट्स लिमिटेड किए जाने के निर्णय पर कर्नाटक विधान परिषद सदस्य आइवन डिसोजा ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि यह कदम केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि मेंगलूरु की पहचान और अस्मिता पर सीधा आघात है।

आंदोलन की चेतावनी

शहर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में डिसोजा ने चेतावनी दी कि यदि जिला प्रशासन और कारखाना प्रबंधन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो वे स्वयं कारखाने पहुंचकर नया नामपट्ट हटाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर मेंगलूरु महानगर निगम आयुक्त से भी चर्चा की जाएगी और आवश्यकता पडऩे पर उपवास सत्याग्रह सहित आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा।

गौरवशाली इतिहास का उल्लेख

डिसोजा ने कहा कि वर्ष 1971 में संयुक्त उपक्रम के तौर पर स्थापित एमसीएफ का 55 वर्षों का गौरवशाली इतिहास है। इनमें से 15 वर्ष सरकारी स्वामित्व में और लगभग 35 वर्ष निजी क्षेत्र के अधीन रहने के बावजूद इसका नाम कभी नहीं बदला गया। इस कारखाने के लिए भूमि मेंगलूरु के लोगों ने दी थी और जल भी स्थानीय संसाधनों से आता है। ऐसे में अचानक नाम परिवर्तन करना जनता की भावनाओं की अनदेखी है।

प्रबंधन और विलय की प्रक्रिया

उन्होंने कहा कि 1991 में एमसीएफ का प्रबंधन यूबी कंपनी को सौंपा गया था और 2015 में यह बिड़ला समूह के अधीन आया। बाद में एडवेंट्ज ग्रुप के अंतर्गत झुवारी, पीपीएल और एमसीएफ का विलय किया गया। पिछले वर्ष अक्टूबर में पारादीप फॉस्फेट्स के साथ एकीकरण के दौरान एमसीएफ का ऐतिहासिक नाम समाप्त कर दिया गया, जिसे उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

रोजगार पर चिंता

डिसोजा ने कहा कि वर्ष 1990 में एमसीएफ में लगभग एक हजार स्थायी कर्मचारी कार्यरत थे, जबकि अब यह संख्या घटकर 450 रह गई है। स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षित नौकरियां धीरे-धीरे बाहरी लोगों को दी जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एमसीएफ नाम के साथ मेंगलूरु के लोगों का पांच दशकों से भावनात्मक रिश्ता है और इसे मिटाने का प्रयास जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।

संघर्ष का विस्तार

उन्होंने कहा कि 500 से अधिक पूर्व कर्मचारी पहले ही इस संघर्ष में आगे आ चुके हैं। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

इस अवसर पर एमसीएफ के पूर्व कर्मचारी मैक्सिम अल्फ्रेड डिसोजा, मोहम्मद अली, शाहिल हमीद तथा एमसीएफ वर्कर्स यूनियन के महासचिव सुरेश बी.के. उपस्थित थे।

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By Bharat Ki Awaz

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