बारिश में जलभराव का खतरा
तटबंध अधूरे, पुल की दीवार टूटी
नागरिकों ने की स्थायी मरम्मत मांग
मेंगलूरु. शहर में हर वर्ष बरसात के दौरान शहरी नालों से पानी उफान पर आकर निचले इलाकों में घुस जाता है और घर-सडक़ें जलमग्न हो जाती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए नालों के किनारे ऊंचे तटबंध बनाने की आवश्यकता है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर काम अधूरा है।
कोडियालबैल, भगवती नगर, अलके और कोट्टार चौकी जैसे कुछ क्षेत्रों में तटबंध ऊंचे किए गए हैं, परन्तु अन्य जगहों पर अब भी नाले सडक़ और घरों से सटे हुए हैं। कई स्थानों पर नाले जमीन के स्तर पर ही हैं, जिससे पानी सीधे सडक़ों पर फैल जाता है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
कोट्टार चौकी में शहरी नाले के किनारे लोहे की रेलिंग लगाई गई है, जिससे वाहनों के गिरने का खतरा कम हुआ है। लेकिन तटबंध ऊंचे न होने से जलभराव की समस्या बनी हुई है। दो वर्ष पहले यहां एक ऑटो रिक्शा नाले में गिरने से चालक की मौत भी हो चुकी थी।
राष्ट्रीय राजमार्ग 66 पर बंग्रकूलूरु के पास पुल की तटदीवार महीनों से टूटी हुई है, जिससे वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों ने इसे तुरंत ठीक करने की मांग की है।
नागरिकों का कहना है कि शहर के कई हिस्सों में नालों की दीवारें मिट्टी की बनी हैं, जो बरसात में धसक जाती हैं। अस्थायी रूप से रेत की बोरियां रखकर समाधान किया जाता है, लेकिन स्थायी मरम्मत नहीं होती। स्थाई कंक्रीट तटबंध ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।
बरसात से पहले यदि अधूरे कार्य पूरे नहीं किए गए तो इस वर्ष भी शहर के कई हिस्सों में जलभराव और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहेगी।

