सरकार के सामने नई चुनौती
जलजीवन मिशन के तहत जांच में सामने आई समस्या
मंड्या जिला सबसे अधिक प्रभावित
हुब्बल्ली. गर्मी के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल समस्या से जूझ रही राज्य सरकार के सामने अब दूषित पानी की नई चुनौती खड़ी हो गई है। कर्नाटक के 5 हजार से अधिक गांवों में पानी की गुणवत्ता खराब पाई गई है, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है।
जांच में सामने आई गंभीर स्थिति
ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनुसार, चालू वर्ष में 2.23 लाख पानी के नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 12 हजार नमूने दूषित पाए गए। इन नमूनों में आयरन, नाइट्रेट और लवण की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है। पिछले वर्षों की तुलना में यह समस्या लगातार बनी हुई है।
मंड्या जिला सबसे ज्यादा प्रभावित
राज्य में सबसे अधिक दूषित पानी की समस्या मंड्या जिले के गांवों में देखी गई है। कुल मिलाकर लगभग 5 हजार गांव इस समस्या से जूझ रहे हैं, जहां लोगों को वैकल्पिक जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
सरकार के प्रयास जारी
समस्या से निपटने के लिए सरकार ने प्रभावित गांवों में शुद्ध पेयजल इकाइयों की स्थापना को प्राथमिकता दी है। राज्य के 18 हजार गांवों में पहले ही ऐसी इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अलावा बहु-ग्राम पेयजल योजनाओं के माध्यम से स्थायी समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है।
टैंकर और बोरवेल से हो रही आपूर्ति
वर्तमान में 20 जिलों के 60 तालुकों के 324 गांवों में पेयजल संकट बना हुआ है। इनमें से 76 गांवों में टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है, जबकि 248 गांवों में निजी बोरवेल किराए पर लेकर जल आपूर्ति की जा रही है।
लगातार बढ़ रही चिंता
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में 24 हजार, 2024-25 में 17 हजार और 2025-26 में 12 हजार पानी के नमूने दूषित पाए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि पानी की गुणवत्ता सुधारना अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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