किसान संगठन का आरोप
युगादी के बाद ऑडियो जारी करने का दावा
आंदोलन से पीछे हटने के लिए प्रलोभन देने का आरोप
लोकायुक्त व मुख्यमंत्री को साक्ष्य सौंपने की बात
हुब्बल्ली. मलप्रभा दाएं और बाएं तट नहरों के पुनर्विकास कार्य में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर आंदोलन कर रहे किसान संगठन ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
रैयत (किसान) सेना कर्नाटक संगठन के राज्य अध्यक्ष वीरेश सोबरदमठ स्वामी ने दावा किया कि आंदोलन से पीछे हटने के लिए उन्हें फोन कर प्रलोभन दिया गया था और उस बातचीत का ऑडियो वे युगादी के बाद सार्वजनिक करेंगे।
धारवाड़ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सोबरदमठ स्वामी ने कहा कि प्रलोभन से संबंधित जानकारी और कथित घटिया निर्माण कार्यों के दस्तावेजों की सीडी 29 जनवरी को लोकायुक्त न्यायाधीश को सौंप दी गई है। इसके अलावा 8 फरवरी को मुख्यमंत्री को भी सीडी सहित शिकायत दी गई है। युगादी के बाद इस मामले से जुड़े ऑडियो और दस्तावेज मीडिया के सामने जारी किए जाएंगे।
वीरेश सोबरदमठ ने आरोप लगाया कि वर्ष 2015-16 में लगभग 2186.39 करोड़ रुपए की लागत से मलप्रभा दाएं और बाएं तट नहरों के पुनर्विकास का काम किया गया था। इस परियोजना का उद्देश्य नहर के अंतिम छोर तक किसानों की जमीनों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना था, लेकिन यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर खेतों तक पहुंचने वाली सर्विस रोड ठीक से नहीं बनाई गई है और छोटी नहरों पर क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाएं भी नहीं बनाई गईं। उनके अनुसार निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है।
सोबरदमठ स्वामी ने कहा कि इस संबंध में वर्ष 2023 में लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई गई थी और आवश्यक दस्तावेज भी सौंपे गए थे। जून 2025 में तीन दिनों तक जांच भी की गई, लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारी जांच में उपस्थित नहीं हुए, जिससे जांच में देरी हुई और मामले को भटकाने की कोशिश की गई।
वीरेश सोबरदमठ ने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
संवाददाता सम्मेलन में जी.टी. बडिगेर, मुत्तु पाटिल, मल्लण्णा हालेकार और शिवु बडिगेर मौजूद थे।

