गर्मी के साथ बढ़ी आग की घटनाएं
जैव विविधता और वन्यजीवों पर मंडरा रहा संकट
दांडेेली (उत्तर कन्नड़). सह्याद्रि पर्वतमाला की गोद में बसे प्राकृतिक संपदा से भरपूर दांडेेली क्षेत्र में गर्मी की शुरुआत के साथ ही जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ गया है। घने जंगल, समृद्ध जैव विविधता और नदियों के लिए प्रसिद्ध इस क्षेत्र में बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं ने वन विभाग और पर्यावरण प्रेमियों की चिंता बढ़ा दी है।
दांडेेली क्षेत्र प्रसिद्ध दांडेेली वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत आता है, जहां बाघ, तेंदुआ, भालू और जंगली हाथी सहित अनेक दुर्लभ वन्यजीव पाए जाते हैं। ये जंगल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ उत्तर कन्नड़ जिले के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वन विभाग के अनुसार गर्मी के मौसम में जंगलों में सूखी पत्तियां और घास अधिक होने से आग तेजी से फैलने की संभावना रहती है। हालांकि कई मामलों में मानवीय लापरवाही भी वनाग्नि का प्रमुख कारण बन रही है। जंगल में फेंके गए सिगरेट के टुकड़े, पर्यटकों द्वारा लापरवाही से जलाई गई आग, शिकार या कृषि के लिए लगाई गई आग अक्सर बड़े पैमाने पर जंगल में फैल जाती है।
वनाग्नि का सबसे अधिक नुकसान छोटे जीव-जंतुओं, पक्षियों और सरीसृपों को होता है। आग की वजह से पेड़-पौधे और वनस्पति नष्ट हो जाते हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन को गंभीर नुकसान पहुंचता है। कई वर्षों में विकसित हुई जैव विविधता कुछ ही घंटों में नष्ट होने का खतरा पैदा हो जाता है।
वन विभाग ने आग की घटनाओं को रोकने के लिए जंगलों में गश्त बढ़ाने, ग्रामीणों में जागरूकता फैलाने और आग लगाने पर सख्त नियंत्रण जैसे कदम उठाए हैं। अधिकारियों ने पर्यटकों से भी अपील की है कि वे जंगलों में घूमते समय पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी दिखाएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि दांडेेली के जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं हैं, बल्कि यह जैव विविधता, जल स्रोतों और मानव जीवन का महत्वपूर्ण आधार हैं। इसलिए इन्हें वनाग्नि से बचाना सरकार के साथ-साथ हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

