जातीय समीकरणों में उलझी कांटे की टक्कर
कांग्रेस की विरासत और गारंटी योजनाएं बनाम भाजपा की नई सामाजिक रणनीति
मुस्लिम वोटों का बिखराव और जाति गणित बने निर्णायक
दावणगेरे. दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव इस बार बेहद रोचक और बहुआयामी मुकाबले में बदल गया है। कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर ने इस चुनाव को “परंपरा बनाम नया प्रयोग” की जंग बना दिया है। वरिष्ठ नेता शामनूर शिवशंकरप्पा की गैरमौजूदगी में कांग्रेस के लिए अपनी पकड़ बनाए रखना चुनौती है, वहीं भाजपा इस सीट पर पहली जीत दर्ज करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
युवा बनाम जमीनी चेहरा
कांग्रेस ने 27 वर्षीय, विदेश में शिक्षित समर्थ शामनूर को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने वल्मीकि समुदाय से आने वाले अनुभवी कार्यकर्ता श्रीनिवास टी. दासकरियप्पा को टिकट दिया है। यह मुकाबला एक ओर राजनीतिक विरासत, तो दूसरी ओर जमीनी नेतृत्व के बीच टकराव के रूप में देखा जा रहा है।
मुस्लिम वोटों में बिखराव का असर
करीब 40 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में इस बार असंतोष देखने को मिल रहा है। एसडीपीआई समेत 13 अन्य मुस्लिम उम्मीदवारों की मौजूदगी कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। यही कारण है कि यह फैक्टर चुनाव परिणाम को सीधे प्रभावित कर सकता है।
जातीय समीकरण
दावणगेरे दक्षिण का चुनावी गणित पूरी तरह जातीय संतुलन पर टिका हुआ है।
मुस्लिम समुदाय – लगभग 40 प्रतिशत (निर्णायक भूमिका)
वीरशैव-लिंगायत – करीब 35 हजार मतदाता (दूसरा सबसे बड़ा वर्ग)
दलित (एससी/एसटी) – महत्वपूर्ण प्रभाव, विशेषकर भाजपा का फोकस
अन्य श्रमिक व पिछड़ी जातियां – 25-30 छोटे समुदाय, जो परिणाम बदलने की क्षमता रखते हैं
भाजपा वल्मीकि (एसटी) उम्मीदवार के जरिए ‘अहिंद’ वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस परंपरागत जातीय समीकरणों और अपने नेटवर्क पर भरोसा कर रही है।
भाजपा का नया प्रयोग, कांग्रेस की परंपरा
भाजपा ने इस बार सामान्य कार्यकर्ता को टिकट देकर नया दांव खेला है। वहीं कांग्रेस परिवारवाद और अनुभव के सहारे चुनाव मैदान में है। दोनों दलों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।
विकास बनाम गारंटी योजनाएं
चुनाव में विकास का मुद्दा पीछे छूटता नजर आ रहा है। कांग्रेस गारंटी योजनाओं को प्रमुखता दे रही है, जबकि भाजपा क्षेत्र में विकास की कमी को मुद्दा बना रही है। दावणगेरे दक्षिण में अब भी बेहतर अस्पताल, कॉलेज और रोजगार के अवसरों की कमी बनी हुई है।
डिजिटल और जमीनी जंग साथ-साथ
इस बार चुनावी मुकाबला सोशल मीडिया पर भी तेज है। दोनों उम्मीदवार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं और एआई आधारित प्रचार के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
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कुल मतदाता – 2,32,564
पुरुष – 1,14,165
महिला – 1,18,355
तृतीय लिंग – 44
युवा मतदाता – 2,204
85+ आयु वर्ग – 2,157
2023 चुनाव के आंकड़े
मतदान प्रतिशत – 69.48 प्रतिशत
कांग्रेस – 84,298 वोट (57.6 प्रतिशत)
भाजपा – 56,410 वोट (38.5 प्रतिशत)
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