मछुआरों ने उठाई दोबारा निविदा की मांग
विभाग बदलाव, ऑनलाइन प्रक्रिया और अव्यवहारिक नियमों से बढ़ा असंतोष
48 तालाबों की नीलामी पर सवाल
शिकारीपुर (शिवमोग्गा). शिकारीपुर, सोरब और सागर तालुक के छोटे सिंचाई विभाग के अंतर्गत आने वाले तालाबों में मछली फसल की नीलामी के लिए जारी टेंडर का व्यापक विरोध हो रहा है। मछुआरों और स्थानीय संगठनों ने टेंडर प्रक्रिया को अव्यवस्थित बताते हुए पुन: टेंडर जारी करने की मांग की है।
विभाग बदलने से बढ़ा भ्रम
अब तक यह टेंडर मछली पालन विभाग द्वारा जारी किया जाता था, जिससे मछुआरों, ग्राम पंचायतों और सहकारी समितियों को सीधी सूचना मिलती थी। लेकिन इस बार लघु सिंचाई विभाग ने ऑनलाइन टेंडर जारी किया, जिसकी जानकारी केवल अखबारों तक सीमित रही। इससे अधिकांश मछुआरे प्रक्रिया से अनजान रह गए।
अव्यवहारिक नियमों पर आपत्ति
मछुआरों का कहना है कि मछली पालन विभाग जुलाई से जून तक के चक्र के अनुसार काम करता है, ताकि बारिश में मछली बीज डालकर बाद में उत्पादन लिया जा सके। लेकिन मार्च में टेंडर निकालने से तालाबों में पानी कम होने के कारण मछली पालन संभव नहीं है।
सरकार को होगा नुकसान
स्थानीय मछुआरों के अनुसार, गर्मी के मौसम में तालाबों में पानी कम होने के बावजूद सुरक्षा जमा और न्यूनतम बोली तय करने में उचित मानक नहीं अपनाए गए हैं। पहले जहां न्यूनतम बोली तय होती थी, इस बार ऐसा नहीं किया गया, जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
तकनीकी बाधाएं बनीं बड़ी समस्या
ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में भी कई तकनीकी समस्याएं सामने आई हैं। रजिस्ट्रेशन समय सीमा और सिस्टम की खामियों के कारण इच्छुक मछुआरे टेंडर भर नहीं पा रहे हैं। अधिकांश पारंपरिक मछुआरे तकनीकी रूप से सक्षम नहीं होने के कारण प्रक्रिया से बाहर रह गए हैं।
मछुआरे श्यामसुंदर का कहना है कि पारंपरिक मछुआरों को ध्यान में रखते हुए पहले की तरह ही सरल प्रक्रिया में टेंडर जारी करना चाहिए।
अधिकारियों को दी गई जानकारी
लघुे सिंचाई विभाग के एईई एच.एन. रमेश नायक ने बताया कि तीनों तालुकों के 48 तालाबों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई है और विरोध के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया है।
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