विकलांग सेवा केंद्र में भावुक संबोधन, समाजसेवा को बताया सच्ची साधना
हुब्बल्ली. आचार्य विमलसागर सूरीश्वर ने कहा कि आज के स्वार्थपूर्ण समय में सेवा-कार्यों के बिना इस पृथ्वी का सुरक्षित रहना संभव नहीं है। मानवता की शक्ति ही इस धरा को संभाले हुए है। जो लोग दूसरों के कल्याण के लिए सोचते हैं, वही सच्चे अर्थों में फरिश्ते होते हैं।
विनायक नगर स्थित उषा बाल विकलांग सेंटर में आयोजित गरिमापूर्ण समारोह में उन्होंने ये विचार व्यक्त किए।
आचार्य ने कहा कि सेवा और मानवता पर बोलना आसान है, लेकिन तन-मन से सेवा में जुट जाना अत्यंत कठिन कार्य है।
आचार्य ने कहा कि करीब 34 वर्ष पूर्व राजस्थान के बाड़मेर जिले के सिवाना निवासी शांतिलाल ओस्तवाल ने अपनी विकलांग बेटी के बेहतर जीवन के उद्देश्य से प्रोफेसर राघवेंद्र ओकड़े के साथ मिलकर इस संस्थान की स्थापना की थी। आज यह संस्था सैकड़ों दिव्यांग बच्चों के जीवन में प्रकाश ला चुकी है। बिना सरकारी सहायता के, दानदाताओं और स्वयं के संसाधनों से यह केंद्र संचालित हो रहा है।
भावुक होते हुए आचार्य ने कहा कि प्रोफेसर राघवेंद्र ओकड़े के दृढ़ संकल्प के बिना यह सेवा संभव नहीं थी। यहां चल रही 19 प्रकार की थेरेपी और प्रशिक्षण से बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है, जो किसी दैवीय शक्ति से कम नहीं है।
गणि पद्मविमलसागर ने भी प्रशिक्षक शिक्षिकाओं की सेवा-भावना की सराहना करते हुए कहा कि उनके लिए यह कार्य अब नौकरी नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य बन चुका है। केंद्र में विभिन्न प्रकार की चुनौतियों से जूझ रहे बच्चों के लिए प्रेम, सहानुभूति और संभावनाओं का वातावरण तैयार किया गया है।
आचार्य ने लोगों से अपील की कि वे समय-समय पर ऐसे सेवा केंद्रों का दौरा करें, ताकि जीवन की वास्तविकताओं को समझ सकें और अहंकार से दूर रह सकें। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बच्चों से मुलाकात कर आशीर्वाद दिया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर विभिन्न संस्थाओं के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। इससे पूर्व संतगण केश्वापुर से पदयात्रा करते हुए विनायक नगर पहुंचे, जहां सैकड़ों लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया।

