उप्पिनबेटगेरी में जत्रा महोत्सव में आध्यात्म और मानवीय मूल्यों पर जोर
हुब्बल्ली. केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि भारत की मूल शक्ति अध्यात्म है और यहां धर्म केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं, बल्कि ऐसा जीवन दर्शन है जो सभी को बिना किसी बाधा के जीने का अधिकार देता है। यही कारण है कि विदेशों में कमाने गए लोग भी संकट के समय अपने देश लौटते हैं।
वे धारवाड़ तालुक के उप्पिनबेटगेरी गांव में आयोजित श्रीगुरु विरूपाक्षेश्वर जत्रा महोत्सव में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि बसवेश्वर और शिवशरणों द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलना आज भी प्रासंगिक है और समाज को उसी दिशा में आगे बढऩा चाहिए।
सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे युद्धों में मानवता कहीं खोती नजर आ रही है, जहां इंसानों को केवल आंकड़ों के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने विश्व शांति की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि मानव कल्याण के लिए युद्धों का समाप्त होना जरूरी है।
उन्होंने उप्पिनबेटगेरी गांव के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास को समझने वाले ही बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। मठ और समाज के बीच गहरा संबंध है, जो लोगों के जीवन में मूल्य स्थापित करने का कार्य करते हैं।
कार्यक्रम के तहत 23 मार्च को सुबह 10 बजे सहस्र सुमंगली पूजन, दोपहर 3 बजे पालकी महोत्सव और शाम 5 बजे भव्य रथोत्सव आयोजित किया जाएगा। रात 10 बजे ‘मातु बिद्दितु, मौन गेद्दितु’ (शब्द गिर गया, मौन जीत गया) सामाजिक नाटक का मंचन भी किया जाएगा।

