आरटीआई से सामने आई जानकारी
खर्च पर पारदर्शिता पर सवाल
हुब्बल्ली. 2023 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो कार्यक्रमों पर तत्कालीन भाजपा सरकार ने कुल 33 करोड़ रुपए खर्च किए थे। इनमें से केवल जनसमूह जुटाने के लिए ही 6.5 करोड़ रुपए खर्च किए गए। यह जानकारी ‘लंचमुक्त (रिश्वत मुक्त) कर्नाटक’ संगठन के मंजुनाथ हिरेचौटी द्वारा दाखिल सूचना के अधिकार (आरटीआई) आवेदन से सामने आई है।
27 फरवरी 2023 को शिवमोग्गा हवाई अड्डे के उद्घाटन समारोह पर 18.81 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इस कार्यक्रम में विभिन्न स्थानों से लोगों को लाने के लिए 1,800 बसों का उपयोग किया गया, जिस पर 4.11 करोड़ रुपए खर्च हुआ। प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के भाषण मंच पर जर्मन मॉडल का वाटरप्रूफ पंडाल, ग्रीन रूम, स्टॉल और फूलों की सजावट पर 1.8 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इन सभी खर्चों के लिए लोक निर्माण विभाग ने केटीपीपी अधिनियम की धारा 4(जी) के तहत छूट ली थी।
इसके बाद बेलगावी में हुए दूसरे कार्यक्रम पर 14.35 करोड़ रुपए खर्च किए गए, जिसमें से 2.5 करोड़ रुपए केवल लोगों को लाने-ले जाने पर खर्च हुए। मंजुनाथ ने मार्च 2023 में आरटीआई आवेदन दिया था और जनवरी 2026 में जानकारी प्राप्त की।
मंजुनाथ का कहना है कि सार्वजनिक धन प्रचार का साधन नहीं है। चुनावी समय में विकास योजनाओं को राजनीतिक मंच पर प्रस्तुत करना पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।
इस पर तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री सी.सी. पाटील ने कहा कि उन्हें खर्च का विवरण याद नहीं है और वे जानकारी लेकर प्रतिक्रिया देंगे।
वर्तमान मंत्री सतीश जारकीहोली ने कहा कि ऐसे खर्चों पर सीमा लगाने की संभावना पर विचार किया जाएगा, लेकिन यह आसान नहीं है। मैंने मंत्री बनने के बाद केटीपीपी अधिनियम के तहत छूट रोक दी है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों पर खर्च की सीमा तय करना कठिन है, इस पर फाइलें देखकर निर्णय लिया जाएगा।
यह खुलासा राजनीतिक कार्यक्रमों पर सरकारी धन के उपयोग को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ रहा है।

