22 वर्षों से दो नेताओं के बीच ही सिमटी बागलकोट की लड़ाईएचवाई मेटी और वीरन्ना चरंतीमठ।

एचवाई मेटी के निधन से खाली सीट पर उपचुनाव

कांग्रेस-भाजपा फिर आमने-सामने

बागलकोट. कर्नाटक के बागलकोट विधानसभा क्षेत्र में वरिष्ठ कांग्रेस नेता एचवाई मेटी के निधन के बाद होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। 4 नवंबर 2025 को मेटी के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी और अब उपचुनाव की तैयारी चल रही है।

पिछले दो दशकों से अधिक समय से इस सीट की राजनीति मुख्य रूप से दो नेताओं कांग्रेस के एच.वाई. मेटी और भाजपा के वीरन्ना चरंतिमठ के इर्द-गिर्द घूमती रही है। वर्ष 1999 से अब तक हुए छह विधानसभा चुनावों में भाजपा को चार बार और कांग्रेस को दो बार जीत मिली है, जबकि कांग्रेस की दोनों जीतें एच.वाई. मेटी के खाते में ही गई थीं।

1999 के चुनाव में भाजपा के प्रल्हाद पुजारी ने कांग्रेस के डॉ. कंटी राजशेखर कडियाप्पा को महज 138 वोटों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2004 में प्रल्हाद पुजारी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे, जबकि भाजपा के वीरन्ना चरंतीमठ ने 5,522 वोटों से जीत हासिल की।

2008 में भाजपा उम्मीदवार के तौर पर वीरन्ना चरंतीमठ ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। हालांकि 2013 के चुनाव में कांग्रेस के एच.वाई. मेटी ने उन्हें 2,900 वोटों के अंतर से हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचने में सफलता पाई।

इसके बाद 2018 में भाजपा के चरंतीमठ ने वापसी करते हुए मेटी को 15,934 वोटों से पराजित किया। वहीं 2023 के चुनाव में फिर दोनों नेताओं के बीच सीधा मुकाबला हुआ, जिसमें एच.वाई. मेटी ने 5,878 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

विशेष बात यह है कि 2008 से 2023 तक हुए चार चुनावों में कांग्रेस की ओर से एच.वाई. मेटी और भाजपा की ओर से वीरन्ना चरंतीमठ के अलावा कोई अन्य उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरा। इन चार मुकाबलों में दोनों नेताओं ने दो-दो बार जीत और दो-दो बार हार का सामना किया।

अब मेटी के निधन के बाद होने वाले उपचुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता किस दल के उम्मीदवार को विजयमाला पहनाते हैं और क्या इस सीट पर दो दशकों से चली आ रही राजनीतिक परंपरा में कोई बदलाव होता है।

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By Bharat Ki Awaz

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