रिपोर्ट में मलबैक्टीरिया की मात्रा कई गुना अधिक
स्नान और जलक्रीड़ा असुरक्षित
पणजी. प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध गोवा के समुद्री तट अब गंभीर प्रदूषण की चपेट में आ गए हैं। गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य के कई प्रमुख समुद्री तटों और नदियों का पानी स्नान या जलक्रीड़ा के लिए असुरक्षित हो गया है।
रिपोर्ट के अनुसार पानी में मलबैक्टीरिया (फीकल कोलीफॉर्म) की मात्रा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित मानकों से कई गुना अधिक पाई गई है। सामान्यत: 100 मिलीलीटर पानी में मलबैक्टीरिया की मात्रा 100 एमपीएन से कम होनी चाहिए, लेकिन कुछ स्थानों पर यह स्तर बढक़र 3,300 एमपीएन तक पहुंच गया है। यह निर्धारित सीमा से करीब 300 गुना अधिक है, जो गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के प्रदूषित पानी में स्नान करने या जलक्रीड़ा गतिविधियों में भाग लेने से त्वचा रोग, संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
चिंता की बात यह भी है कि यह प्रदूषण केवल समुद्री तटों तक सीमित नहीं है। गोवा के लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने वाली खांडेपार नदी में भी मलबैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई है। इससे जलस्रोतों की स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित सीवेज, कचरे का समुद्र और नदियों में प्रवाह तथा पर्यटन गतिविधियों के बढ़ते दबाव के कारण जलप्रदूषण की स्थिति गंभीर होती जा रही है। उन्होंने प्रदूषण पर तत्काल नियंत्रण और जलस्रोतों की नियमित निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया है।

