गैस की कमी, फंड अभाव और अव्यवस्था से जूझ रही गरीबों की ‘अन्न सेवा’
चिक्कमगलूरु. जिले में गरीबों और छात्रों के लिए सहारा बनी इंदिरा कैंटीनें इन दिनों गंभीर समस्याओं से जूझ रही हैं। गैस सिलेंडर की कमी, वित्तीय संकट और अव्यवस्था के चलते इन कैंटीनों की स्थिति दयनीय हो गई है। जिले में कुल सात इंदिरा कैंटीनें संचालित हैं, जो पहले प्रतिदिन करीब 4 हजार लोगों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराती थीं, लेकिन अब सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
गैस संकट से घटा भोजन, कहीं बंद भी
अधिकांश कैंटीनों में रसोई गैस की कमी के कारण लकड़ी के चूल्हों का सहारा लिया जा रहा है, जिससे भोजन की मात्रा और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हुई हैं। तरिकेरे में गैस संकट के चलते कैंटीन को बंद करना पड़ा, जिससे सैकड़ों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कडूर और बीरूर में भी गैस आपूर्ति बाधित होने से मेन्यू सीमित कर दिया गया है। जहां पहले इडली, चपाती और विविध भोजन मिलते थे, अब केवल साधारण भोजन ही परोसा जा रहा है।
6-8 महीने से नहीं मिला वेतन
कोप्पा और शृंगेरी सहित कई स्थानों पर कैंटीन कर्मचारियों को पिछले 6 से 8 महीनों से वेतन नहीं मिला है। इसके बावजूद कर्मचारी काम कर रहे हैं, लेकिन उनमें असंतोष बढ़ रहा है।
शृंगेरी कैंटीन में बिजली व्यवस्था खराब है, छत टपकती है और उपकरण भी खराब पड़े हैं। कर्मचारी बिजली के झटके के डर से मशीनें चलाने से बचते हैं।
स्थानांतरण और घटती ग्राहक संख्या
चिक्कमगलूरु शहर में बस स्टैंड के पास स्थित कैंटीन को कत्रिमारम्मा मंदिर के पास स्थानांतरित किया गया है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि बाजार के पास होने से लोगों को सुविधा होगी, लेकिन अस्पताल, कॉलेज और बस स्टैंड से दूर होने के कारण उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं।
मूडिगेरे में कैंटीन सुव्यवस्थित होने के बावजूद ग्राहकों की संख्या में गिरावट आई है। आसपास निजी होटलों की उपलब्धता भी एक कारण मानी जा रही है।
खराब मशीनें और बुनियादी समस्याएं
कई कैंटीनों में बॉयलर, पानी शुद्धिकरण संयंत्र और अन्य उपकरण खराब पड़े हैं। भवनों की हालत भी खराब है, जिससे स्वच्छता और सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
अनुदान में देरी से बढ़ी मुश्किलें
कैंटीन संचालन के लिए सरकारी अनुदान समय पर नहीं मिल रहा है। फरवरी 2025 के बाद लंबे समय तक फंड जारी नहीं हुआ। हाल ही में कुछ महीनों का अनुदान जारी किया गया है, लेकिन अभी भी बकाया राशि का भुगतान होना बाकी है।
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