सीएसआर के नाम पर गड़बड़ी? अधिकारी पर गंभीर आरोपदांडेली के कुछ इलाकों में सडक़ और फुटपाथ पर अतिक्रमण कर भवन निर्माण करते मजदूर।

दांडेली में वेस्ट कोस्ट पेपर मिल की परियोजनाओं पर सवाल

बिना अनुमति निर्माण और अतिक्रमण के आरोप

दांडेली (उत्तर कन्नड़). उत्तर कन्नड़ जिले के दांडेली शहर में स्थित प्रमुख औद्योगिक इकाई वेस्ट कोस्ट पेपर मिल की कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के बाद स्थानीय स्तर पर व्यापक चर्चा और असंतोष का माहौल बन गया है।

जानकारी के अनुसार, कंपनी द्वारा सामाजिक दायित्व के तहत कई विकास कार्य किए गए हैं, जिन्हें पहले सराहा गया था। लेकिन हाल के दिनों में कुछ परियोजनाओं में नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कंपनी के पीआरओ अधिकारी और उनकी टीम ने सीएसआर परियोजनाओं के नाम पर ठेके के काम बिना आवश्यक अनुमति के शुरू किए।

सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी सीएसआर परियोजना को लागू करने से पहले स्थानीय निकायों की अनुमति, पारदर्शिता और जनहित सुनिश्चित करना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद, दांडेली के कुछ इलाकों में सडक़ और फुटपाथ पर अतिक्रमण कर आंगनवाड़ी समेत भवन निर्माण किए जाने के आरोप हैं।

लेनिन रोड मोड़ पर बने एक निर्माण का मामला अदालत तक पहुंच चुका है, जहां कथित अतिक्रमण पर स्थायी निषेधाज्ञा (परमानेंट इंजंक्शन) जारी की गई है। बावजूद इसके, आरोप है कि न्यायालय के आदेश की अनदेखी करते हुए कार्य जारी रखा गया।

इस मामले में नगर पालिका आयुक्त द्वारा नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन आगे की कार्रवाई में देरी और लापरवाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सीएसआर योजनाएं कंपनियों की सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतीक होती हैं और उनका दुरुपयोग व्यक्तिगत लाभ या राजनीतिक प्रभाव के लिए करना कानून के खिलाफ है। कंपनी अधिनियम 2013 के तहत सीएसआर नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य है।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि सभी अतिक्रमण तुरंत हटाए जाएं, न्यायालय के आदेशों को सख्ती से लागू किया जाए, संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो और सीएसआर फंड के उपयोग की पारदर्शी जांच कराई जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि राजनीतिक संरक्षण के आधार पर कानून उल्लंघन को नजरअंदाज किया गया, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा और प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर आंच आएगी।

 

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By Bharat Ki Awaz

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