कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हुब्बल्ली एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिएकर्नाटक उच्च न्यायालय।

5 वर्षीय बालिका दुष्कर्म-हत्या के आरोपी की मुठभेड़ पर मजिस्ट्रेट से 8 जून तक रिपोर्ट तलब

प्रक्रियागत खामी मिली तो सीबीआई जांच के संकेत

हुब्बल्ली. कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हुब्बल्ली में पांच वर्षीय बालिका से दुष्कर्म व हत्या के आरोपी बिहार के प्रवासी मजदूर रितेश कुमार के कथित पुलिस एनकाउंटर की जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट (स्वतंत्र न्यायिक) से कराने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले की समग्र जांच कर 8 जून तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

यह आदेश ‘पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज-कर्नाटक’ (पीयूसीएल) के महा महासचिव ई. शुजायुत उल्ला और महिला अधिकार कार्यकर्ता मधु भूषण की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। मुख्य न्यायाधीश विभु बखरू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई करते हुए कहा कि यदि मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट में पुलिस की कार्यप्रणाली में कोई अंतर या विसंगति पाई गई तो मामले को आगे की जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा जा सकता है।

क्या है मामला

रितेश कुमार पर हुब्बल्ली में 5 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म कर हत्या करने का आरोप था। पुलिस के अनुसार, 13 अप्रेल 2025 को उसे घटनास्थल का पंचनामा कराने ले जाया गया था, जहां उसने भागने का प्रयास किया। इसी दौरान पुलिस ने गोली चलाई और वह एनकाउंटर में मारा गया।

याचिका में उठे सवाल

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि पुलिस स्वयं न्यायाधीश बनकर आरोपी को दंडित नहीं कर सकती। उन्होंने बालिका और एनकाउंटर में मारे गए व्यक्ति के शव सुरक्षित रखने, तथा पोस्टमॉर्टम के लिए दिल्ली या कर्नाटक से बाहर के विशेषज्ञ सर्जनों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को शामिल कर स्वतंत्र विशेष जांच दल गठित करने की मांग की है। साथ ही, जांच अदालत की निगरानी में कराने का अनुरोध किया गया है।

उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद अब पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसकी रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।

Spread the love

By Bharat Ki Awaz

मैं भारत की आवाज़ हिंदी न्यूज़ पोर्टल से जुड़ा हुआ हूँ, जहाँ मेरा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा ख़बरें पहुँचाना है। राजनीति, समाज, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों पर गहरी रुचि रखते हुए मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि समाचार केवल सूचना न हों, बल्कि पाठकों को सोचने और समझने का अवसर भी दें। मेरी लेखनी का मक़सद है—जनता की आवाज़ को मंच देना और देश-समाज से जुड़े हर पहलू को ईमानदारी से प्रस्तुत करना। भारत की आवाज़ के माध्यम से मैं चाहता हूँ कि पाठक न केवल ख़बरें पढ़ें, बल्कि उनसे जुड़ाव महसूस करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *