25 हजार से अधिक तालाबों की दलदली भूमि खतरे में
प्लास्टिक, कचरा और औद्योगिक अपशिष्ट बन रहे मौत का कारण
हुब्बल्ली. कर्नाटक के तालाबों की दलदली भूमि (वेटलैंड्स) आज गंभीर संकट में है। कभी जैव विविधता की पालना कही जाने वाली ये जगहें अब प्रदूषण और अतिक्रमण की चपेट में आकर जहरीली होती जा रही हैं। राज्य के 25 हजार से अधिक तालाबों में से लगभग 65 प्रतिशत की दलदली भूमि समाप्त हो चुकी है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि दलदली भूमि न केवल सूक्ष्म जीवों, पक्षियों और सरीसृपों का सुरक्षित बसेरा है, बल्कि यह मीठे पानी की आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण और जलवायु परिवर्तन को कम करने में भी अहम भूमिका निभाती है। इसके बावजूद, पिछले एक दशक में बढ़ते प्लास्टिक कचरे, निर्माण अपशिष्ट, शहरी सीवेज और औद्योगिक जहरीले पानी ने इन पारिस्थितिक तंत्रों को तहस-नहस कर दिया है।
कैसे बढ़ा खतरा?
विशेषज्ञ बताते हैं कि तालाबों में सीधे छोड़े जा रहे रासायनिक और औद्योगिक अपशिष्ट ने पानी को दूषित कर दिया है। दलदली भूमि का नाश जैव विविधता के लिए मृत्यु घंटा साबित हो रहा है। राज्य के कुल भूभाग का लगभग 6 प्रतिशत हिस्सा दलदली क्षेत्रों से आच्छादित है, लेकिन इनमें से अधिकांश अब प्रदूषण और अतिक्रमण से बर्बाद हो चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य की 40 प्रतिशत वनस्पति और जीव-जंतु प्रजातियां इन्हीं क्षेत्रों में रहती हैं या यहीं प्रजनन करती हैं।
रामसर मान्यता, फिर भी संरक्षण अधूरा
कर्नाटक में फिलहाल चार अंतरराष्ट्रीय रामसर स्थल हैं। 2022- रंगनतिट्टू पक्षी अभयारण्य, 2024 – मागडी झील, अंकोसमुद्र पक्षी अभयारण्य, अघनाशिनी नदी क्षेत्र। इसके बावजूद हजारों छोटे तालाबों की दलदली भूमि आज भी असुरक्षित है। भारत में वर्तमान में 96 से अधिक रामसर स्थल अधिसूचित हैं, लेकिन कर्नाटक के अधिकांश तालाब संरक्षण से वंचित हैं।
चेतावनी
पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि सरकारों ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले वर्षों में पक्षी, मछलियां, उभयचर, जल कीट, प्लवक और सूक्ष्म जीवों की कई प्रजातियां हमेशा के लिए लुप्त हो सकती हैं।
यह रिपोर्ट बताती है कि कर्नाटक की दलदली भूमि केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जैव विविधता की मातृभूमि है। यदि इन्हें बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढिय़ों को इन पारिस्थितिक खजानों से वंचित होना पड़ेगा।
नष्ट होने से बचाना सबकी जिम्मेदारी
दलदली भूमि असंख्य जीवों की शरणस्थली हैं। विकास की अंधी दौड़ में इन्हें नष्ट होने से बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
–प्रकाश गौडर, पर्यावरण विशेषज्ञ, धारवाड़
आंकड़े
कर्नाटक के कुल तालाब – 25,000 से अधिक
जिन तालाबों में दलदली भूमि समाप्त – 65 प्रतिशत
राज्य का दलदली क्षेत्र – 6 प्रतिशत भूभाग
कर्नाटक के रामसर स्थल – 4
भारत में रामसर स्थल – 96 से अधिक

