‘खंभों की बुनियाद’ अवशेष मिले, उत्खनन कार्य पांचवें दिन में पहुंचा
गदग. जिले के ऐतिहासिक लक्कुंडी गांव में चल रहे उत्खनन कार्य ने सोमवार को दो महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजों को सामने लाया। सुबह शुरू हुए उत्खनन के महज एक घंटे के भीतर नवपाषाण युग की मानी जा रही पत्थर की कुल्हाड़ी मिली। इसके साथ ही मंदिर स्तंभों के आधार के रूप में प्रयुक्त होने वाली ‘बोदीगे’ नामक संरचना भी प्राप्त हुई। वहीं, रविवार को मिली डेढ़ फीट ऊंची पत्थर की नाग-सर्प प्रतिमा को सोमवार को पूरी तरह बाहर निकाला गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इन अवशेषों की सटीक तिथि और महत्व का विस्तृत अध्ययन आगे किया जाएगा।
उत्खनन की प्रगति
वर्तमान में कृषि कुंड (फार्म पिट) के मॉडल पर 10गुणा10 माप के चार चौकोर गड्ढे खोदे जा रहे हैं। सोमवार को डेढ़ फीट तक खुदाई की गई और अब तक कुल 3.5 फीट गहराई तक उत्खनन हो चुका है।
मजदूरी बढ़ाने की मांग
कृषि सखी विजयलक्ष्मी कटिग्गार के नेतृत्व में सोमवार को 24 महिलाएं और 10 पुरुष, कुल 34 श्रमिक उत्खनन कार्य में लगे रहे। लक्कुंडी विकास प्राधिकरण ने दैनिक मजदूरी 374 रुपए तय की है। श्रमिकों का कहना है कि वे सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक काम करते हैं, जबकि इसी समय कृषि कार्य में जाने पर 600 रुपए तक मजदूरी मिल जाती है। इसलिए उत्खनन कार्य के लिए भी मजदूरी बढ़ानी चाहिए।
स्थल पर हंगामा
सोमवार को उत्खनन स्थल पर पहुंचे एक भगवा वस्त्रधारी व्यक्ति ने दावा किया कि वह कित्तूर रानी चेन्नम्मा का वंशज शिवप्पा हीरेमठ है। उसने कहा कि जिस जगह वह खड़ा है, वहीं खुदाई की जाए क्योंकि वहां 100 किलो वजनी स्वर्ण चामुंडी की मूर्ति है। वह हाथ में अखबार लेकर एक पैर पर खड़ा होकर तीन चक्कर लगाता रहा और अजीब हरकतें करता रहा। सतर्क ग्रामीणों ने तुरंत उसे वहां से भगा दिया।
लक्कुंडी उत्खनन से लगातार मिल रहे अवशेषों ने इतिहासकारों और पुरातत्वविदों की उत्सुकता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण खोजें सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

