कालसर्प दोष निवारण पूजन
दावणगेरे. साध्वी भव्यगुणा ने कालसर्प दोष के विषय में कहा कि भगवान पाश्र्वनाथ संसार के उच्चतम श्रद्धा केंद्र हैं। उनके नाम के स्मरण मात्र से संसार की आधि-व्याधि और उपाधि दूर हो जाती है।
शहर के श्री शंखेश्वर पाश्र्व राजेन्द्र सूरि गुरुमंदिर संघ काईपेट में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी भव्यगुणा ने कालसर्प दोष निवारण पूजन के अवसर पर धर्म सभा को संबोधित कर रहीं थी।
उन्होंने कहा कि भगवान पाश्र्वनाथ और नेमिनाथ की आराधना से कालसर्प योग का निवारण होता है और राहु-केतु के प्रभाव एवं दोष दूर होते हैं।
साध्वी शीतलगुणा ने कहा कि प्रभु सभी के लिए अच्छे और सुंदर होते हैं, परन्तु केवल उनके प्रति भक्ति रखने वाले ही उन्हें अपने आत्मा के साथ जोडक़र अनुभव कर पाते हैं।
उन्होंने विभिन्न भक्तों जैसे श्रेणिक, सुलसा, मयणा, मीराबाई, सूरदास, शबरी का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका प्रभु के प्रति लगाव उन्हें प्रभुमय बनाता है। जैसे वृक्ष जड़ से बंधा सुरक्षित रहता है, पतंग डोर से और बच्चा मां की उंगली पकडक़र, वैसे ही आत्मा प्रभु की आज्ञा से बंधी सुरक्षित रहती है।
साध्वी ने कहा कि धन केवल भौतिक सुरक्षा देता है, पुण्य सुरक्षा देता है, परंतु परमात्मा सम्मति, सद्गति और सिद्धिगति प्रदान करता है। प्रभु की आज्ञा पालन से ही शुभध्यान, शुद्ध ध्यान और शुक्ल ध्यान प्रकट होता है।
पूजन में अंबालाल शाह ने बताया कि प्रभुभक्तों ने पुष्प, धूप, दीपक, अक्षत, नैवेद्य और फल अर्पित कर सामूहिक आरती और मंगलदीप किया। इस अवसर पर शंखेश्वर पाश्र्वनाथ भगवान की आरती का लाभ आकाश अशोक कुमार कटारिया (बेंगलूरु), मुकेश कुमार मुथा (चित्रदुर्ग), महावीर कुमार वग्तावरमल संचेती ने लिया।
कालसर्प दोष निवारण महापूजन के लाभार्थी महावीरकुमार वग्तावरमल संचेती और गौतमचंद नाहर का बहुमान भंवरलाल पेराजमल जैन, सुरेश कुमार संघवी और सुरेश मोहनलाल ने किया। महिलाओं का बहुमान प्रेमा संचेती, मधु संघवी और रिंकु पोरवाल ने किया।
संघ के अध्यक्ष पुनमचंद सोलंकी और ट्रस्ट मंडल ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।

