बीमारियों, आंधी-ओलावृष्टि और बारिश से उत्पादन घटा
मुआवजे की मांग तेज
हुब्बल्ली. हुब्बल्ली और धारवाड़ क्षेत्र में इस वर्ष आम की फसल को भारी नुकसान हुआ है। हर साल किसी न किसी कारण से नुकसान झेल रहे किसान इस बार भी संकट में हैं। फसल पर रोगों का प्रकोप, इसके बाद तेज हवाओं, ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
दिसंबर और जनवरी में आम के पेड़ों पर भरपूर बौर आने से किसानों में अच्छी पैदावार की उम्मीद जगी थी। लेकिन कुछ ही महीनों में रोग लगने से बड़े पैमाने पर फूल झड़ गए। हाल ही में हुई तेज बारिश और आंधी के कारण कच्चे आम बड़ी संख्या में जमीन पर गिर गए, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आई है।
किसानों की पीड़ा
गामनगट्टी के किसान बसवराज मनगुंडी ने बताया कि उनके बाग में 300 आम के पेड़ हैं, जिनमें करीब 50 प्रतिशत फसल नष्ट हो चुकी है। उन्होंने इस साल 3.30 लाख रुपए में फसल का ठेका दिया है, जबकि पिछले वर्ष 5 लाख रुपए की आमदनी हुई थी। बीमा से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन प्रक्रिया धीमी है।
किसान ईश्वर माळण्णवर ने कहा कि उनके 800 पेड़ों से पिछले साल 5 ट्रॉली उत्पादन हुआ था और इस बार 8 ट्रॉली की उम्मीद थी, लेकिन अधिकांश फसल बर्बाद हो गई। उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि यदि यही स्थिति रही तो किसान खेती छोडऩे पर मजबूर हो सकते हैं।
वैज्ञानिक योजना और मुआवजे की मांग
मांग उठ रही है कि सरकार आम फसल के लिए वैज्ञानिक राहत योजना तैयार करे। धारवाड़ का प्रसिद्ध “अप्पूस” आम (अलफोंसो आम) बचाने के लिए विशेष प्रयास जरूरी बताए जा रहे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि बीमा मुआवजा पूर्ण नुकसान की भरपाई नहीं करता, इसलिए शीघ्र अतिरिक्त सहायता देनी चाहिए।
किसानों को उम्मीद है कि मई-जून तक राहत मिल जाएगी, अन्यथा आम की खेती से उनका मोहभंग हो सकता है।
विशेष मुआवजे का प्रस्ताव भेजा जाएगा
कलघटगी और कुंदगोल क्षेत्रों में सर्वे किया गया है और सरकार को विशेष मुआवजे का प्रस्ताव भेजा जाएगा।
–काशीनाथ भद्रण्णवर, उपनिदेशक, बागवानी विभाग
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