नाबालिग गर्भवती बनीं सबूत, शहापुर में बाल विवाह उजागरशहापुर तालुक में बाल विवाह मुक्त रथ जागरूकता अभियान को हरी झंड़ी दिखाकर रवाना करते हुए अतिथि।

माता कार्ड बनवाने अस्पताल पहुंचीं लड़कियों की उम्र जांच में सामने आए मामले

पुलिस जांच में कई चुनौतियां

शहापुर (यादगीर). शहापुर तालुक में बाल विवाह के मामले चिंताजनक रूप से सामने आ रहे हैं। हाल ही में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां नाबालिग लड़कियां गर्भवती अवस्था में अस्पताल में माता कार्ड बनवाने पहुंचीं और उम्र की जांच के दौरान उनके बाल विवाह का खुलासा हुआ।

बाल विकास एवं महिला विभाग द्वारा इन मामलों की जानकारी संबंधित पुलिस थानों को दी जा रही है, जिसके बाद जांच की जिम्मेदारी पुलिस के पास जाती है।

लगातार बढ़ रहे मामले

पिछले दिनों भीमरायनगुडी और गोगी थाना क्षेत्र में तीन-तीन तथा शहापुर थाना क्षेत्र में पांच मामले दर्ज किए गए हैं। इन सभी मामलों में पीडि़ता को छोडक़र लडक़े और लडक़ी के माता-पिता के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जांच में आ रही कठिनाइयां

पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान कई समस्याएं सामने आती हैं। आधार कार्ड में जन्मतिथि बदलकर उम्र अधिक दर्शाई जाती है, जिससे वास्तविक उम्र का सत्यापन कठिन हो जाता है। स्कूल रिकॉर्ड और मेडिकल प्रमाण पत्र जुटाने में भी समय और मेहनत लगती है।

इसके अलावा जब आरोपी पक्ष को गिरफ्तार करने की कार्रवाई की जाती है, तो गांवों में विरोध और हंगामे की स्थिति बन जाती है, जिससे कार्रवाई और मुश्किल हो जाती है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर सवाल

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि गांवों में कार्यरत आंगनवाड़ी कर्मियों को हर घर की जानकारी होती है। यदि समय रहते बाल विवाह की सूचना दी जाए, तो ऐसे मामलों को रोका जा सकता है। लेकिन कई बार उनकी चुप्पी के कारण मामला सामने आने के बाद ही कानूनी कार्रवाई करनी पड़ती है।

कार्यकर्ताओं की मजबूरी

वहीं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि बाल विवाह रोकने का प्रयास करने पर उन्हें धमकियां मिलती हैं या हिंसा का खतरा रहता है। कई बार परिवार गुप्त रूप से विवाह कर लेते हैं या अन्य स्थानों पर जाकर यह कार्य करते हैं, जिससे जानकारी मिलना मुश्किल हो जाता है।

जागरूकता और सख्ती की जरूरत

अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि बाल विवाह के दुष्परिणामों को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ कानून के सख्त पालन की आवश्यकता है। विवाह सीजन के दौरान विशेष निगरानी जरूरी है।

सीडीपीओ मल्लन्ना देसाई ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड उम्र का अंतिम प्रमाण नहीं है। स्कूल रिकॉर्ड और मेडिकल प्रमाण ही मान्य होंगे। साथ ही, बाल विवाह होने पर संबंधित क्षेत्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

उन्होंने लोगों से 1098 हेल्पलाइन पर तुरंत सूचना देने की अपील की है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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