होटल बंद, लकड़ी के चूल्हे बने सहारा
आपूर्ति पर उठे सवाल
गदग. मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब देश के छोटे कस्बों तक दिखाई देने लगा है। गैस सिलेंडर की आपूर्ति में बाधा के कारण नरेगल होबली (राजस्व केंद्र) में घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के सिलेंडरों की भारी कमी हो गई है। हालात ऐसे हैं कि घरों और होटलों में फिर से लकड़ी के चूल्हों पर खाना पकाना पड़ रहा है।
कई चाय और नाश्ते की दुकानें बंद हो चुकी हैं, जबकि कुछ होटल पिछले कई दिनों से तालेबंद हैं। बस स्टैंड के सामने स्थित ‘होटल विराट’ एक सप्ताह से बंद है। इडली-वड़ा केंद्र और छोटे खानावली भी प्रभावित हुए हैं। कुछ दुकानदारों ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत इलेक्ट्रिक स्टोव और बॉयलर का सहारा लिया है, लेकिन यह गैस का पूर्ण विकल्प नहीं बन पा रहा।
होटल संचालकों का कहना है कि बिजली, किराया और कर्मचारियों का खर्च निकालना मुश्किल हो गया है। लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना महंगा और समय लेने वाला है।
ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी
गैस की कमी से ग्रामीण इलाकों में लोग पुराने तरीके अपनाने को मजबूर हैं। कई लोग घर के बाहर, आंगन या सडक़ किनारे अस्थायी चूल्हे बनाकर खाना पका रहे हैं। हवा से बचाव के लिए ईंट, टीन और अन्य साधनों का उपयोग किया जा रहा है।
आपूर्ति पर विरोधाभासी दावे
एक गैस एजेंसी के मालिक अशोक कलकोण्णवर के अनुसार, सिलेंडर की सप्लाई अनियमित हो गई है। पहले हर दो दिन में आने वाला लोड अब चार दिन में पहुंच रहा है और पिछले 25 दिनों से व्यावसायिक सिलेंडर नहीं मिले हैं। वहीं खाद्य निरीक्षक उमेश अरलिगिड्डा का कहना है कि आपूर्ति सामान्य है और मांग के अनुसार सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
स्थिति को लेकर लोगों में असमंजस बना हुआ है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो होटल उद्योग को बड़ा नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

