आयात-निर्यात का 95 प्रतिशत समुद्र मार्ग से
आधुनिक बंदरगाहों और नई नीतियों से तेजी से बढ़ रहा समुद्री क्षेत्र
मेंगलूरु. भारत में हर वर्ष 5 अप्रेल को राष्ट्रीय जलयान दिवस मनाया जाता है, जो देश के समुद्री इतिहास और वैश्विक समुद्री व्यापार में उसकी बढ़ती भूमिका की याद दिलाता है। यह दिन भारत की समुद्री क्षमता, बंदरगाहों के विकास और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में योगदान को रेखांकित करता है।
समुद्री व्यापार में भारत की बड़ी हिस्सेदारी
देश के कुल विदेशी आयात-निर्यात का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्ग से होता है। यही कारण है कि भारत सरकार समुद्री क्षेत्र को वैश्विक शक्ति केंद्र बनाने के लक्ष्य के साथ लगातार कार्य कर रही है।
तेजी से हो रहा बुनियादी ढांचे का विकास
‘मैरिटाइम इंडिया विजन-2030’ के तहत 150 से अधिक परियोजनाओं पर लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, जहाज क्षमता में वृद्धि और आंतरिक जलमार्गों को मजबूत करना है।
वहीं ‘मैरिटाइम अमृत काल विजन-2047’ के तहत भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार में अग्रणी बनाना और स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक एक-तिहाई वैश्विक समुद्री व्यापार संभालने का लक्ष्य रखा गया है।
बंदरगाहों की कार्यक्षमता में बड़ा सुधार
पिछले दशक में देश के बंदरगाहों की क्षमता लगभग दोगुनी हो चुकी है। जहाजों के बंदरगाह पर रुकने का समय 93 घंटे से घटकर 48 घंटे रह गया है, जिससे व्यापार में गति आई है। महाराष्ट्र के वाधवन में एक मेगा पोर्ट निर्माण की भी मंजूरी दी गई है।
जहाज निर्माण और रोजगार पर जोर
देश में जहाज निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 69,725 करोड़ रुपए का पैकेज घोषित किया गया है। इसके तहत ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर और शोध केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। 2047 तक इस क्षेत्र में 20 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
जलमार्गों का विस्तार और डिजिटल क्रांति
राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या 3 से बढक़र 29 हो गई है और इन पर माल परिवहन में 700 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही, बंदरगाहों का तेजी से डिजिटलीकरण किया जा रहा है और हरित ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
भारत आज विश्व के प्रमुख समुद्री देशों में चौथे स्थान पर पहुंच चुका है और आने वाले वर्षों में वैश्विक समुद्री शक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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