केंद्रीय मंत्री के डीपीआर दावे पर पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल
“सर्वे बिना रिपोर्ट कैसे तैयार?”
सिरसी. बेड़ती-वरदा नदी जोड़ परियोजना को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी के उस बयान से नई बहस छिड़ गई है जिसमें उन्होंने कहा कि परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है और कर्नाटक सरकार ने तीन महीने पहले ही इसके लिए सहमति दे दी है।
दरअसल, डॉ. के. सुधाकर द्वारा संसद में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने यह जानकारी दी। हालांकि इस बयान के बाद उत्तर कन्नड़ जिले के पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस दावे पर गंभीर संदेह जताया है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान में प्रस्तावित परियोजना का स्वरूप बदलकर “बेड़ती-हिरेवड्डट्टी” कर दिया गया है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि बिना वैज्ञानिकों के स्थल निरीक्षण, विस्तृत सर्वेक्षण और व्यवहार्यता अध्ययन के इतनी जल्दी डीपीआर तैयार होना तकनीकी रूप से कैसे संभव है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार, राज्य सरकार ने वर्ष 2021 में ही बेड़ती-वरदा नदी जोड़ योजना को स्थगित कर दिया था। इसलिए आशंका जताई जा रही है कि केंद्रीय मंत्री जिस डीपीआर का उल्लेख कर रहे हैं, वह संभवत: पहले तैयार की गई पुरानी रिपोर्ट हो सकती है, न कि संशोधित “बेड़ती-हिरेवड्डट्टी” परियोजना की नई डीपीआर।
इस मुद्दे पर बेड़ती-अघनाशिनी कोंकण संरक्षण समिति के अध्यक्ष अनंत हेगडे अशिसर ने कहा कि इतने कम समय में नई डीपीआर तैयार होना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। इस संबंध में केंद्र के जल संसाधन विभाग से आधिकारिक जानकारी प्राप्त करने के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
गौरतलब है कि पहले भी बेड़ती-वरदा और अघनाशिनी-वेदावती नदी जोड़ योजनाओं के खिलाफ जिले भर में बड़े पैमाने पर आंदोलन हो चुके हैं। सिरसी में गंगाधरेंद्र सरस्वती के नेतृत्व में आयोजित विशाल विरोध सभा में हजारों लोगों ने परियोजना को रद्द करने की मांग की थी।
जहां हावेरी क्षेत्र के कुछ मठाधीश और जनप्रतिनिधि इस परियोजना के पक्ष में हैं, वहीं उत्तर कन्नड़ के कई पर्यावरण संगठन इसके संभावित पर्यावरणीय दुष्परिणामों को लेकर लगातार विरोध कर रहे हैं। हाल ही में मामला शांत हुआ था, लेकिन मंत्री के ताजा बयान के बाद एक बार फिर आंदोलन तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

