अहिंसा, अनेकांत और क्षमा ही विश्वशांति का मार्गआचार्य विमलसागर सूरीश्वर की निश्रा में महावीर जन्म कल्याणक पर निकली गई रथयात्रा में उमड़े श्रावक-श्राविकाएं।

धर्मसभा में आचार्य विमलसागर सूरीश्वर का संदेश

महावीर जन्म कल्याणक पर निकली रथयात्रा

गूंजे अहिंसा के संदेश

हुब्बल्ली. 24वें तीर्थंकर भगवान महावीरस्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक के उपलक्ष्य में हुब्बल्ली में रथयात्रा और धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शहर श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। प्रात: शांतिनाथ मंदिर, कंचगार गली से निकली विशाल रथयात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए और “महावीर स्वामी की जय” के जयघोष से वातावरण गूंज उठा।

अहिंसा ही मानव अस्तित्व का आधार

निर्माणाधीन सिवांची भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य विमलसागर सूरीश्वर ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व युद्ध के खतरे के बीच भगवान महावीर की अहिंसा, अनेकांतवाद और क्षमा की शिक्षाएं ही शांति का एकमात्र मार्ग हैं। आज वैश्विक स्तर पर कट्टरता, सत्ता की लालसा और हथियारों की होड़ मानव अस्तित्व के लिए खतरा बन चुकी है। ऐसे संकट में महावीर के सिद्धांत मानवता को सहअस्तित्व और शांति का मार्ग दिखाते हैं।

विश्व के लिए आज भी प्रासंगिक महावीर के सिद्धांत

आचार्य ने कहा कि धन, तकनीक और शक्ति से शांति स्थापित नहीं की जा सकती, बल्कि सहिष्णुता और परस्पर सम्मान ही स्थायी समाधान हैं। अहिंसा को मानव जीवन का आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि हिंसा और जीवन लंबे समय तक साथ नहीं चल सकते। अनेकांतवाद सभी विचारों को स्वीकार करने की प्रेरणा देता है, जबकि क्षमा ही विवादों का समाधान है।

सभी संप्रदायों की सहभागिता

धर्मसभा में तपागच्छ, खरतरगच्छ, स्थानकवासी, तेरापंथी सहित विभिन्न जैन संप्रदायों के प्रतिनिधियों ने विचार रखे। पंन्यास जिनांगयश विजय, मुनि आर्यशेखर विजय और गणि पद्मविमलसागर ने भी महावीर के सिद्धांतों की वर्तमान में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। साध्वी सूर्यप्रभा भी अपनी शिष्याओं के साथ कार्यक्रम में उपस्थित रहीं।

श्रद्धा और उल्लास से सजी रथयात्रा

रथयात्रा में पुरुष वर्ग श्वेत वस्त्र और साफा धारण कर, जबकि महिलाएं लाल परिधानों में सुसज्जित होकर शामिल हुईं। बैंड-बाजों की धुन पर श्रद्धालु नृत्य करते हुए आगे बढ़े। मार्ग में प्रसाद के रूप में मिठाई वितरित की गई। युवा संगठनों ने एक समान वेशभूषा में रथ को खींचते हुए भक्ति का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया।

शहरभर में उत्सव का माहौल

जन्म कल्याणक के अवसर पर पूरे शहर में घर-घर तोरण, रंगोली और दीप प्रज्ज्वलन किया गया, जिससे हुब्बल्ली पूरी तरह आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर हो गया।

 

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