कर्नाटक के कई जिलों से हजारों श्रद्धालु पैदल रवाना
राह में सेवा शिविर व नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच
रायचूर. आंध्र प्रदेश के नंद्याल जिले के नल्लमला वन क्षेत्र में स्थित श्रीशैल मल्लिकार्जुन स्वामी के दर्शन के लिए कर्नाटक के विजयपुर, बागलकोट, यादगीर और कलबुर्गी जिलों से हजारों श्रद्धालु दिन-रात पदयात्रा कर रहे हैं। सुबह और शाम के समय सडक़ों पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या दिखाई दे रही है।
पदयात्रा में महिलाएं, बच्चे और युवा भजन-कीर्तन करते हुए ‘मल्लय्या’ का स्मरण करते आगे बढ़ रहे हैं। गर्म डामर सडक़ से पैरों को बचाने के लिए कुछ युवक हल्के लकड़ी के टुकड़ों या बांस को पैरों से बांधकर संतुलन बनाते हुए चल रहे हैं, जबकि कई श्रद्धालु सिर पर गीला कपड़ा रखकर तेज धूप से बचाव कर रहे हैं।
श्रद्धालु श्रीशैल में होली पूर्णिमा से शुरू होकर उगादी तक चलने वाले भव्य मेले में भाग लेने जा रहे हैं। यह उत्सव भगवान शिव और माता पार्वती (भ्रमराम्बा) की आराधना का महापर्व माना जाता है। शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों और 18 महाशक्ति पीठों में से एक होने की मान्यता के कारण यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।
यात्रा मार्ग में कई स्थानों पर दानदाताओं द्वारा टेंट लगाकर छाया और पीने के पानी की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं को केले, तरबूज, खरबूजा, पपीता, शरबत और म_ा भी वितरित किया जा रहा है। यात्री प्रतिदिन 20 से 30 किलोमीटर तक पैदल चल रहे हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु 40 किलोमीटर तक का सफर तय कर रहे हैं।
वीरशैव रुद्रसेना के अध्यक्ष शिवशरण रेड्डी ने बताया कि रायचूर में वीरशैव रुद्र सेना के नेतृत्व में पदयात्रियों के लिए नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया है, जहां पैदल चलने से पैरों में सूजन वाले श्रद्धालुओं का उपचार किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु श्रीशैल की ओर बढ़ रहे हैं और अगले छह दिनों तक सेवा शिविरों के माध्यम से भोजन व स्वास्थ्य सेवाएं जारी रहेंगी।

