800 किमी पाइपलाइन के बावजूद सिर्फ 20 हजार घरों तक पहुंच
जागरूकता की कमी बड़ी वजह
हुब्बल्ली. हुब्बल्ली-धारवाड़ में एलपीजी गैस की कमी और आपूर्ति में देरी के बीच पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) एक बेहतर विकल्प के रूप में उभर रही है, लेकिन पर्याप्त प्रचार-प्रसार के अभाव में इसका लाभ आम लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है।
धाबोल-बेंगलूरु गैस पाइपलाइन परियोजना के तहत हुब्बल्ली-धारवाड़ शहर में लगभग 800 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है, जिसकी क्षमता 60 से 75 हजार घरों को जोडऩे की है। इसके बावजूद अब तक केवल करीब 20 हजार घरों को ही पीएनजी कनेक्शन मिल पाया है। वहीं, व्यावसायिक उपयोग के लिए 14 सीएनजी स्टेशन संचालित हो रहे हैं।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने से होटल उद्योग और घरेलू उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सिलेंडर बुकिंग के बाद लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में पीएनजी की मांग अचानक बढ़ी है और लोग कनेक्शन के लिए आवेदन कर रहे हैं।
इंडियन ऑयल-अडानी गैस प्रा. लि. के एसोसिएट जनरल मैनेजर विनोद पापल ने बताया कि पीएनजी सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल है। इसमें लगातार आपूर्ति रहती है और बुकिंग की जरूरत नहीं पड़ती। पाइपलाइन से गैस पहुंचने के कारण परिवहन लागत भी कम होती है।
उन्होंने कहा कि करीब 200 करोड़ रुपए की लागत से यह नेटवर्क तैयार किया गया है और अब मांग तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, पहले जागरूकता की कमी और कुछ क्षेत्रों में नेटवर्क न होने के कारण विस्तार धीमा रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सरकार और कंपनियां प्रचार बढ़ाएं तथा नेटवर्क का विस्तार करें, तो पीएनजी भविष्य में एनपीजी का सशक्त विकल्प बन सकता है।
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