दक्षिण कन्नड़-उडुपी में सूची तैयार, कार्यकर्ताओं का विरोध
पुत्तूर (दक्षिण कन्नड़). ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं घर-घर पहुंचाने वाली आशा कार्यकर्ताओं की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। जनसंख्या के आधार पर कुछ कार्यकर्ताओं को हटाने की योजना से 163 आशा कार्यकर्ताओं में भय का माहौल है।
2009 में प्रत्येक ग्राम पंचायत क्षेत्र में 1,000 लोगों पर एक आशा कार्यकर्ता नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था। कई जगह 800-900 की आबादी वाले क्षेत्रों में भी नियुक्तियां हुई थीं। वर्तमान में केंद्र सरकार 2,500 रुपए और राज्य सरकार 5,000 रुपए का मानदेय देती है।
दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में कुल 2,126 आशा कार्यकर्ता हैं, जिनमें से 163 ऐसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं जहां जनसंख्या 1,000 से कम है। सरकार ने इनकी सूची तैयार कर संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों को भेज दी है।
पुत्तूर, बंटवाल, मेंगलूरु, बेल्तंगडी, सुल्या और उडुपी के कुछ तालुकों में ऐसे कार्यकर्ता चिन्हित किए गए हैं। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि दुर्गम और वन क्षेत्रों में घर-घर पहुंचना कठिन है, इसलिए केवल जनसंख्या को आधार बनाकर नौकरी समाप्त करना अनुचित है। उनका तर्क है कि यह केंद्र सरकार की मार्गदर्शिका के भी विपरीत है।
आशा कार्यकर्ताओं ने विधायक अशोक कुमार राई के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपकर किसी को भी नौकरी से न हटाने की मांग की है।
आशा कार्यकर्ताओं का योगदान गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों को टीकाकरण, एचआईवी और क्षय रोगियों की पहचान, स्वास्थ्य शिविरों में लोगों को लाना और सरकारी योजनाओं का प्रचार करने में महत्वपूर्ण रहा है। कम मानदेय और अधिक काम के बावजूद वे वर्षों से स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बनी हुई हैं।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. तिम्मय्या ने कहा कि जनसंख्या के आधार पर हटाने की सूचना हमारे संज्ञान में नहीं है, इसकी जांच की जाएगी।

