गौडगेरे गांव में खोज, प्राचीन सैन्य शक्ति और किले की सुरक्षा व्यवस्था का प्रमाण
विजयपुर। जिले के तालुक स्थित गौडगेरे गांव में देवगिरि यादव शासकों से जुड़ा एक दुर्लभ उभरा हुआ (रिलीफ) शिल्प खोजा गया है। इस शिल्प में आमने-सामने खड़े होकर युद्ध करते मदमस्त हाथियों (गजों) का चित्रण है, जो उस समय की शक्तिशाली गजसेना का प्रतीक माना जा रहा है।
राष्ट्रीय अनुसंधान मंच के अध्यक्ष लायप्पा इंगले ने बताया कि यह खोज उनके संगठन द्वारा किए गए क्षेत्रीय सर्वेक्षण के दौरान सामने आई। उनके अनुसार, इस प्रकार का अनोखा शिल्प पहली बार इस क्षेत्र में मिला है।
किले की सुरक्षा और सैन्य शक्ति का प्रमाण
विशेषज्ञों के मुताबिक यह शिल्प देवगिरि यादवों, जिन्हें सेउण (सेवुण) वंश के नाम से भी जाना जाता है, की राजधानी से जुड़े किले में उकेरा गया था। यह उस समय की सुदृढ़ किलेबंदी, गजदल (हाथी सेना) और प्रभावशाली रक्षा तंत्र का स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करता है।
ऐतिहासिक महत्व
इतिहासकारों का मानना है कि ऐसे शिल्प केवल सजावट के लिए नहीं, बल्कि शासकों की सैन्य शक्ति और वैभव को दर्शाने के उद्देश्य से बनाए जाते थे। गौडगेरे में मिला यह शिल्प न केवल क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करता है, बल्कि देवगिरि यादवों की युद्धक क्षमता और स्थापत्य कला की झलक भी प्रस्तुत करता है।
इस अवसर पर बसवराज कुबकड्डी, उमेश शिवशरण, भीमराय कुंटोजी और प्रशांतगौडा पाटिल उपस्थित थे।
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