सिवांची ओसवाल जैन संघ का भव्य खुला अधिवेशन
समाज एकता और आत्मशुद्धि का संदेश
हुब्बल्ली. आचार्य विमलसागर सूरीश्वरजी ने कहा कि धर्म केवल क्रियाओं का नाम नहीं, बल्कि जीवन परिवर्तन का मार्ग है। जब तक मन, व्यवहार और विचार शुद्ध नहीं होंगे, तब तक आराधना अधूरी रहेगी।
सिवांची ओसवाल जैन संघ, हुब्बल्ली की ओर से आयोजित खुले अधिवेशन को संबोधित करते हुए आचार्य ने कहा कि समाज को सशक्त बनाना है तो पहले स्वयं के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाना होगा। एकता, संयम और सद्भाव ही समाज की असली ताकत है। गुरु मार्गदर्शन में चलकर ही हम आने वाली पीढ़ी के लिए उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
इस भव्य अधिवेशन में सिवाना निवासी परिवारों सहित समस्त जैन समाज की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रात: 7.00 बजे गुरु भगवंतों के सांबेला (स्वागत) से हुआ। इसके पश्चात नवकारसी (अल्पाहार) तथा प्रात: 9.00 बजे अधिवेशन का विधिवत प्रारंभ हुआ।
दोपहर 11.30 बजे साधार्मिक भक्ति (भोजन) का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लाभार्थी परिवार की ओर से दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई गई।
आचार्य ने युवाओं को विशेष रूप से धर्म, संस्कार और समाज सेवा से जुडऩे का आह्वान किया। आयोजन सिवांची ओसवाल जैन संघ, हुब्बल्ली की ओर से किया गया, जबकि सिवाना जैन संघ, हुब्बल्ली सम्पूर्ण लाभार्थी रहा।
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